kohramlive : कागज में मार दिये गये एक शख्स खुद को जिंदा होने की बात साबित कर ना सके। करीब 6 साल पहले इस शख्स के बड़े भाई फेरई मर गये थे, पर कागज पर छोटे भाई खेलई को मार दिया गया। खेलई को जब से यह पता चला था कि वो कागज में मार दिये गये तो खुद को जिंदा बताने के लिये हर छोटे-बड़े अधिकारी के दरवाजे पर दस्तक दी। सब जगह अर्जी देकर खुद को जिंदा रहने का सबूत देते रहे, पर यह नहीं हो सका। थक-हार वो कोर्ट में चले गये। आज खेलई के जिंदा रहने की बात पर फैसला होने वाला था, पर खेलई बुधवार को सही में मर गये। यह अजीबो-गरीब वाकया यूपी के सतंकबीर नगर से उभरकर सामने आया है। दुनिया से अलविदा हो गये खेरई की जमीन-जायदाद के वारिस भी दूसरे नाते-रिश्तेदार हो गये थे। वारिस बने लोगों ने भी उनका साथ नहीं दिया। अभागा खेरई के बेटे हीरालाल बेहद दुखी है।
घटना को लेकर आई खबरों के अनुसार करीब 6 साल पहले धनघटना के कोड़रा गांव में रहनेवाले फेरई की वर्ष 2016 में मौत हो गई थी। मरे फेरई की जगह उनके छोटे भाई खेलई को मरा दर्शा दिया गया। जिंदा खेलई की दौलत भी बड़े भाई फेरई की पत्नी सोमारी देवी और उनके बेटे हरकनाथ, चालूराम और छोटेलाल के नाम से कर दिया गया। यह बातें जब जिंदा रहे खेलई जाने तो वो अवाक रह गये। तब से वो खुद को जिंदा रहने का सबूत देते फिर रहे थे, पर वो जीते जी यह साबित नहीं कर सके। इनके पांच बेटे हैं। खेलई को बुधवार को बयान देने के लिये बुलाया गया था, पर वो सदा के लिये चल बसे। अब संबंधित अधिकारियों की नींद खुली है। अब इस बिंदु पर जांच करने की बात कही जा रही है कि खेलई का मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे और किसने बनाया। वहीं उनकी दौलत दूसरे के नाम कैसे हुआ।
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