Kohramlive : आप खुद को फिट मानते हैं, न कोई दर्द, न चक्कर, न थकान, लेकिन भीतर ही भीतर एक ऐसी बीमारी पल रही हो, जो दिल, दिमाग और किडनी को नुकसान पहुंचा रही हो, तो? जी हां, हाई ब्लड प्रेशर ऐसा ही एक रोग है, जो कई बार बिना कोई आहट दिये सालों तक शरीर में बना रहता है। इसी को कहते हैं साइलेंट हाइपरटेंशन और इसी वजह से इसे साइलेंट किलर कहा जाता है।
क्या है साइलेंट हाइपरटेंशन?
साइलेंट हाइपरटेंशन यानी ऐसा हाई ब्लड प्रेशर जिसमें, सिरदर्द नहीं, चक्कर नहीं, सांस फूलना नहीं, नकसीर नहीं, लेकिन ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, वहीं शरीर कोई चेतावनी नहीं देता। व्यक्ति को लगता है सब ठीक है, जबकि अंदरूनी अंग लगातार नुकसान झेल रहे होते हैं। क्योंकि जब तक लक्षण नहीं दिखते, लोग जांच ही नहीं कराते। और इसी दौरान दिल की मांसपेशियां मोटी होने लगती हैं, हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ता है। आर्टरीज की अंदरूनी परत घिसने लगती है, जिससे ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ता है। ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।किडनी के छोटे ब्लड वेसल्स खराब होने लगते हैं, धीरे-धीरे फेलियर की ओर बढ़ते हैं।
सालों तक पता क्यों नहीं चलता?
- ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे बढ़ता है, शरीर उसे “नॉर्मल” मान लेता है
- शुरुआती स्टेज में ज्यादातर लोगों को कोई लक्षण नहीं होते
- भारत में लोग तब तक जांच नहीं कराते जब तक बीमारी सिर पर न आ जाये
- युवा और फिट दिखने वाले लोग खुद को सुरक्षित मान लेते हैं
- हल्के सिरदर्द या थकान को तनाव या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं
पहचान कैसे करें?
30 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम 2 बार BP जरूर चेक करायें। हाई ब्लड प्रेशर किसी को भी हो सकता है, उम्र, वजन या फिटनेस मायने नहीं रखती। कम नमक, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और संतुलित आहार अपनायें।अगर घर में पहले किसी को BP रहा है, तो और ज्यादा अलर्ट रहें।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिये अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।






