Khunti (Anil Mishra) : “बेशक इंसान मैं भी हूं। मेरे पास भी दिल है। कितना मासूम, कितना सुंदर है यह बच्चा। कैसे इस बच्चे से दूर है इसका बाप। बहुत दुख होगा जब इसका पिता मेरी गोलियों का शिकार होगा। मैं चाहता हूं कि इस बच्चे पर इसके पिता का साया बना रहे। जमाना ठीक नहीं। अनाथों को नाथ नहीं मिल पाता। जब खूंखार जिदन गुड़िया और सनिचर उरांव जैसे उग्रवादी मारे गये, तो सोचिए आपके बेटे सुखराम गुड़िया की क्या बिसात। सरकार ने उसके सिर पर एक लाख का इनाम रखा है। एक हफ्ता नहीं लगेगा उसे खोजकर मार गिराने में। उसे सरेंडर करने को कहें। आपको एक सप्ताह का मौका दिया जाता है। दुबारा यह न कहिएगा कि आपने मौका ही नहीं दिया। सरकार की सरेंडर पालिसी में वह जी खा लेगा। जंगल-जंगल भटकने से बेहतर है कि परिवार के करीब रहे।”
1 लाख के ईनामी सुखराम गुड़िया के माता-पिता और उसकी भाई और पत्नी की मन बदलने की पूरी कोशिश की गयी। कुछ हद तक तपकरा के थानेदार विक्रांत कुमार अपने मकसद में कामयाब भी रहे। मोस्ट वांटेड सुखराम का परिवार थानेदार को वादा देकर निकले कि वह सुखराम को सरेंडर करने के लिए मजबूर करेंगे। थाने में सुखराम के पिता दुगन गुड़िया भाई दुता गुड़िया मां और पत्नी को बुलाया गया था। बातचीत होने तक वह सुखराम के बच्चे को गोद में खिलाते रहे। सुनें क्या बोले थानेदार विक्रांत कुमार…
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