Ormanjhi(Kuldeep/Amitabh) :”दिक्कत बहुत सारी है, क्या-क्या बतायें, कहने को आवासीय विद्यालय है, पर यहां कोई बाथरूम नहीं। शौच के लिये स्टूडेंट को बाल्टी लेकर बाहर जाना पड़ता है। नल है तो उसमें पानी नहीं, नहाने की घोर दिक्कत ही दिक्कत, किचन का हाल बहुत बुरा है, रह-रह कर वहां प्लास्टर झड़ते रहता है। सभी दरवाजे-खिड़कियों की हालत भी ठीक नहीं। सबसे डर तो रात में लगता है, स्कूल में बाउंड्रीवाल नहीं रहने के चलते बेधड़क यहां किसी का भी आना-जाना लगा रहता है। रोकने-टोकने वाला कोई नहीं। रात्रिप्रहरी तक यहां नहीं है। स्कूली बच्चों को अगर रात में बाथरूम जाने की दरकार पड़ती है तो उनका डर से हालत खराब हो जाता है। ऐसा नहीं है कि इन खराब हालतों के बारे में ऊपर बैठे अधिकारियों को पता नहीं है, उन्हें सब पता है, पर न जानें क्यों, इस आवासीय विद्यालय पर किसी का कोई ध्यान नहीं। CM हेमंत सोरेन शिक्षा जगत को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, पर जिन्हें जागना चाहिये, वो जागते नहीं।” ये कहना हैं पिस्का आवासीय विद्यालय की टीचर और कुछ स्टूडेंट का। यह हाल राजधानी रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड के पिस्का आवासीय विद्यालय का है। इस स्कूल में फिलहाल 88 बच्चे पढ़ाई-लिखाई कर रहे हैं। स्कूल में केवल तीन टीचर हैं, वैसे यहां सात टीचर होने चाहिये थे। सुनें क्या बोली स्कूल की प्रभारी शिक्षिका आरती कुमारी….
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