Ranchi (Akhilesh) : पूरे टोला-मोहल्ला में केवल दो चापाकल है, पर दोनों खराब है। कोसों दूर पर एक कुंआ है, पर उसमें भी बाल्टी भर डूबने लायक ही पानी है। बड़ा मुश्किल से एक बाल्टी पानी मिल पाता है, वो भी पीने लायक नहीं है। मजबूरी में उसे छानकर पीना पड़ता है। पानी की चिंता में दिन-रात बीत जाती। हर रोज 4 किलोमीटर पैदल पानी की खोज में जाना पड़ता। अब पूरे टोले का एक कुंआ ही सहारा, वह भी सूखने की हालत में। जलमीनार बना था, उसका सोलर और अन्य पार्ट पूर्जा चोर चुरा कर ले गये। यह हाल है राजधानी रांची से सटे नामकुम प्रखंड के सिल्वे पंचायत भुवालटोली गांव का।
इस गांव में करीब 30 आदिवासी परिवार के करीब 2 सौ लोग रहते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि पानी को लेकर बहुत बुरा हाल है। हालत इतनी खराब है कि हलक तक सूखे रह जाते। स्थानीय मुखिया से लेकर MLA और MP तक को इसकी कोई चिंता नहीं। खेत-जंगल में गढ्ढा खोद कर बमुश्किल थोड़ा बहुत पानी नसीब हो पाता है। पानी के लिए चीख-चीख कर थक हार गये, पर पीने का पानी तक नहीं मिल पाता। पहले चापाकल ठीक था तो उसमें से लाल और गंदा पानी निकलता था, अब वो भी निकलना बंद हो गया। सुनें क्या बोले गांव के लोग…
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