Kohramlive : रसोई में जब भी मसालों की खुशबू उठती है, तो उसमें लौंग की महक अलग ही पहचान बनाती है। छोटी-सी कली, लेकिन स्वाद और औषधीय गुण इतने कि सदियों से दुनिया भर की रसोई और दवाइयों में इसका इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में सबसे पहली बार लौंग का पेड़ आखिर उगा कहां था? इसका जवाब हमें ले जाता है हजारों साल पुरानी एक दिलचस्प कहानी की ओर। इतिहासकारों के मुताबिक करीब तीन हजार साल पहले लौंग के पेड़ केवल पूर्वी एशिया के कुछ द्वीपों तक ही सीमित थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Ternate Island नाम के द्वीप पर दुनिया का सबसे पुराना लौंग का पेड़ मौजूद है, जिसकी उम्र करीब 350 से 400 साल मानी जाती है। यह द्वीप आज भी मसालों की खुशबू और अपने दिलचस्प इतिहास के लिये मशहूर है। टर्नेट द्वीप का ज्यादातर इलाका ज्वालामुखियों से घिरा हुआ है। इसके बावजूद हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने पहुंचते हैं। करीब 3 से 4 हजार साल पहले Ternate Island, Tidore Island और आसपास के कुछ द्वीपों पर ही लौंग के पेड़ पाये जाते थे। यहीं से दुनिया भर में लौंग की खुशबू फैली।
लौंग ने बना दिया था इन द्वीपों को अमीर
उस दौर में लौंग इतना कीमती मसाला था कि इसका व्यापार करने वाले लोग बेहद अमीर हो गये थे। टर्नेट और टिडोर के सुल्तानों के पास जब लौंग के व्यापार से अपार दौलत आई, तो ताकत की होड़ भी शुरू हो गई। धीरे-धीरे दोनों शासकों के बीच संघर्ष बढ़ा और इसका फायदा उठाकर यूरोप के व्यापारी इन इलाकों में घुस आये। बाद में United Kingdom, Netherlands के व्यापारियों ने इन मसाला द्वीपों पर कब्जा कर लिया। लंबे समय तक ये इलाके यूरोपीय देशों के उपनिवेश बने रहे और लौंग का व्यापार पूरी दुनिया में फैल गया। इन द्वीपों की खासियत सिर्फ लौंग ही नहीं है। यहां कई अनोखे जीव-जंतु भी पाये जाते हैं, जिनमें उड़ने वाले मेंढक भी शामिल हैं। उन्नीसवीं सदी में मशहूर ब्रिटिश वैज्ञानिक Alfred Russel Wallace ने नई प्रजातियों की खोज के लिये इन द्वीपों पर कई साल बिताये थे। साल 1862 में जब वॉलेस वापस लंदन लौटे, तो वे अपने साथ एक लाख से ज्यादा जीव-जंतुओं और पौधों के नमूने लेकर गये थे। आज दुनिया में कई प्रजातियों की जानकारी हमें उन्हीं की खोज की वजह से मिल पाई है।











