Hazaribagh(Sunil Sahu) : हजारीबाग की फिजाओं में आज एक अलग हलचल थी। शहर की रूह में बसी वो दहशत, जो 7 मार्च की सुबह की गोलियों से गूंज उठी थी, आज पुलिस के खुलासे के बाद कुछ कमजोर पड़ी। NTPC के DGM कुमार गौरव की दिन-दहाड़े हुई हत्या का सच अब सबके सामने था। एक ऐसी साजिश, जिसे खून से लिखा गया था और जिसका मकसद सिर्फ एक था—खौफ, आतंक और हुकूमत की नंगी भूख। सुबह से ही पुलिस महकमे में सरगर्मी थी। बड़े अफसरों की बैठकों के बाद हजारीबाग के DIG संजीव कुमार ने मीडिया के सामने जब चार कातिलों की तस्वीरें रखीं, तो हॉल में सन्नाटा छा गया। मिंटू कुमार, राहुल मुंडा, मनोज माली और अजय यादव, ये वही चेहरे थे, जिनकी बंदूकों से निकली आग ने कुमार गौरव की सांसें छीन ली थीं।
सिर्फ दहशत फैलाने के लिए ली गई एक जान…
बीते 7 मार्च की रात, जब शहर अपने ख्वाबों में गुम था, ये चारों कातिल अपने मंसूबों को आखिरी शक्ल दे रहे थे। एनकाउंटर में मारे गये गैंगस्टर अमन साहू गिरोह का इशारा था, एक निर्दोष को मारकर पूरे इलाके में खौफ का साया लहराना। मगर किसे? तलाश जारी थी, और तब चुना गया कुमार गौरव को। एक सरल, शांत और ईमानदार अफसर, जो सिर्फ अपना फर्ज निभा रहा था। बीते 8 मार्च की सुबह जब वो रोज की तरह अपनी गाड़ी से निकले, तब तक चार मौत के सौदागर उनकी हर हरकत पर नज़र रख चुके थे। फतेह चौक पर जैसे ही गाड़ी रुकी, एक झटके में मिंटू आगे बढ़ा, ट्रिगर दबाया और कुछ ही सेकंड में गोलियों की आवाज़ पूरे इलाके में गूंज उठी। कुमार गौरव की धड़कनें थम चुकी थीं, लेकिन हत्यारे बेखौफ थे—उनके इरादे पूरे हो चुके थे। DIG संजीव कुमार ने खुलासा किया कि मिंटू कुमार उर्फ छोटा छत्री, जिसने ट्रिगर दबाया, राहुल मुंडा उर्फ मिरिंडा बाइक चलाने वाला था, मनोज माली रेकी करने वाला था और अजय यादव हथियार सप्लाई करने वाला था।
आज का दिन, जब खौफ की दीरा गिरी
पिछले 15 दिनों से पुलिस इस खून की गुत्थी सुलझाने में जुटी थी। हर CCTV फुटेज को खंगाला गया, हर कॉल रिकॉर्डिंग को सुना गया और आखिरकार, आज—साजिश की परतें उघड़ गईं। चार कातिल शिकंजे में थे, मगर सवाल अभी भी हवा में तैर रहा था—क्या इस साजिश के पीछे और भी चेहरे छुपे हैं?
DIG ने जब कहा—“कोई भी अपराधी कानून से नहीं बच सकता,” तो उनकी आवाज़ में सख्ती थी, मगर शहर के लोगों के चेहरों पर अब भी कई सवाल थे। आज, जब पुलिस ने खौफ के सौदागरों को पकड़ लिया है, तब शहर को उम्मीद है कि इस दहशत के कारोबार का अंत भी जल्द होगा। अमन साहू गिरोह का तिलिस्म टूटेगा या ये सिर्फ एक शुरुआत है? वक़्त ही बतायेगा…















