लॉ यूनिविर्सिटी की छात्रा के गुनहगारों को सजा दिलाने वाले डीएसपी को मिलेगा मेडल
Ranchi (Rupam) : उस रोज घनघोर घटा छायी थी। समय था शाम के 5 बजकर 40 मिनट। संग्रामपुर बस स्टॉप रिंग रोड कांके के पास अचानक मोहन अपनी स्कूटी रोक एक किनारे पेशाब करने चला जाता है। वहीं सीमा (बदला हुआ नाम) उसके लौटने का इंतजार करती है। थोड़ी ही देर में मोहन आता है और दिनभर साथ बिताये लम्हों को याद कर दोनों बातें करने लगते हैं। तभी अचानक उनके नजदीक एक कार आकर रूकी, जिसमें 6-7 युवक बैठे थे। सब के सब नशे में टुन थे। एक पल्सर बाइक भी आकर रूकी, जिसपर दो लोग सवार थे। दोनों से पूछा, यहां क्या कर रहे हो। मोहन ने कहा नुरुल हॉस्टल जाना है। तभी कार से उतरे लोग उनके साथ बदतमीजी करने लगे और बोलने लगे, तुमलोगों का धंधा बन गया है। गलत-गलत काम करते हो, इसलिए यहां बैठे हो। सीमा और मोहन को मारा पीटा भी गया। उन्हें घरवालों से फोन पर बात कराने को कहा गया। सीमा अपनी मां को फोन लगाने लगी, तभी एक बदमाश ने फोन छीन लिया और अपने पास रख लिया। तब सभी बदमाश इस जिद में अड़ गये कि हमलोग ही हॉस्टल छोड़ेंगे। दोनों दोस्त गिड़गिड़ाते रहे, पर उन्हें सुनने को कोई तैयार नहीं हुआ।
तभी एक बदमाश सीमा को खींचकर जबरदस्ती अपनी बाइक में बैठाने लगा। सीमा चीखने-चिल्लाने लगी। सीमा की पुकार बेकार गई। तभी उसे धमकी मिली कि चिल्लाओगी तो गोली मार देंगे। सीमा को पल्सर नंबर JHO1DQ-8951 पर बैठा लिया गया। पीछे बैठा बदमाश सीमा का मुंह दबाये था। बाइक ओवरब्रिज के नीचे की तरफ जाने लगी। अचानक बाइक बंद हो गई। पेट्रोल खत्म हो चुका था, तब सीमा को जबरदस्ती कार के अंदर धकेल दिया। कुछ दूर चलने के बाद एक ईंट भट्ठे के पास गाड़ी को रोका गया। बिल्कुल विरान और सुनसान जगह था वह। इसके बाद फोन कर कई लड़कों को बुला लिया गया। तभी एक बदमाश ने उसके दोस्त की स्कूटी दिखाते हुये बोला, चलो तुझे तेरे दोस्त के पास पहुंचा देते हैं। सीमा इतना डर चुकी थी कि उसके मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी। उसे पास के एक खेत में ले जाया गया। वह रोती-गिड़गिड़ाती रही, पर किसी को रहम नहीं आया।
सीमा का सारा शरीर सुन्न हो चुका था। बदमाशों ने बारी-बारी से उसे रौंद डाला। सीमा की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। वह विनती की कि उसे उसके दोस्त के पास ले चलिये और मुझे मेरा फोन दिला दीजिये। तभी वहां एक लाल रंग की बोलेरो गाड़ी आकर रूकी। बदमाशों ने कहा, ये उन्हीं के दोस्त हैं। तब सीमा स्कूटी का हैंडल थामे शख्स से कही मेरी मदद करो, मुझे यहां से ले चलो। इस शख्स ने उससे कहा- रजामंदी से मुझे खुश कर दो, तब वह उसके पैर पकड़कर रोने लगी। तभी उसी लाल रंग की बोलेरो में तीन लोग आये।
जिसमें दो वहीं थे, जो कुछ देर पहले सीमा को नोंच चुके थे। बहुत रोने गिड़गिराने पर सीमा को संजीवनी नर्सिंग होम के पास छोड दिया गया। वहां उसका दोस्त मोहन इंतजार कर रहा था। मोहन ने उससे पूछा, तेरे साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ, तब वह फफक-फफक कर रोने लगी। हॉस्टल पहुंच सीमा ने फोन पर सारी बातें अपनी मां और भाई को बतायी। मामला कांके थाना पहुंचा। इस घटना ने रांची पुलिस को अंदर से हिलाकर रख दिया। सबको दिल्ली की निर्भयाकांड याद आ गई। इस बहुचर्चित कांड का अनुसंधानकर्ता कांके के डीएसपी नीरज को बनाया गया। डीएसपी को महज एक बाइक का नंबर JHO1DQ-8951 मिला।
मिले इस क्लू के आधार पर डीएसपी नीरज कुमार ने इस कांड में शामिल 11 बलात्कारियों (Rapists) सुनील मुंडा, कुलदीप उरांव, सुनील उरांव, संदीप तिर्की, राजन उरांव, नवीन उरांव, अमन उरांव, बसंत कच्छप, रवि उरांव, ऋषि उरांव और अजय मुंडा को गिरफ्तार कर लिया। इन बलात्कारियों (Rapists) को 29 नवंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया था। पीड़िता का 164 के तहत कोर्ट में बयान भी कलमबद्ध कराया गया। घटना में इस्तेमाल बाइक और सेंट्रो कार भी जब्त कर ली गई। पीडिता लॉ यूनिवर्सिटी कांके की छात्रा, वहीं उसका दोस्त बीआईटी मेसरा का स्टूडेंट था। डीएसपी नीरज कुमार ने इस कांड से जुड़े हर सबूत, साक्ष्य और प्रदर्श जुटा लिये। नतीजा 90 दिनों के अंदर बलात्कारियों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई। इन बलात्कारियों को आखिरी सांस तक जेल के अंदर ही रहना होगा। बेहतर अनुसंधान और बलात्कारियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने वाले तेज-तर्रार डीएसपी नीरज कुमार को पुलिस वीरता पदक से नवाजा जायेगा। इन्हें यह पुरस्कार 26 जनवरी को गर्वनर रमेश बैस देंगे।
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