26 जनवरी को सीने पर लगेगा पुलिस वीरता पदक
Ranchi (Pawan Thakur/Rupam) : अपराधियों और उग्रवादियों के इल्म के जानकार IPS अधिकारी सुरेंद्र कुमार झा का उस रोज मन विचलित था। उन्हें इंतजार था किसी के फोन के आने का। सूचना बहुत बड़ी और सटिक मिलने वाली थी। खबरीलाल पर पूरा भरोसा था उन्हें। तब उनका मन यह सोचकर घबरा भी रहा था कि उस भीड़-भाड़ वाले गांव में आखिर खूंखार और 25 लाख के इनामी माओवादी सुनील मांझी को कैसे दबोचा जाये। पूरा दस्ता के साथ घूमने वाले खूंखार सुनील मांझी को पकड़ना बहुत आसान भी नहीं था। इस दस्ते के पास एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक हथियार भी थे। नामुमकिन कुछ नहीं, इस फॉर्मूला पर काम करने वाले आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र कुमार झा तब गिरिडीह के पुलिस कप्तान थे। यह बात 5 मार्च 2018 की है। अचानक उनका मोबाइल बजा, सामने से आवाज आई सर, खूंखार सुनील मांझी अपने पूरे दस्ते के साथ अबकीटांड़ गांव पहुंच गया है। वहां मीटिंग करने की तैयारी में है। यह गांव गिरिडीह के पीड़टांड़ और डुमरी थाना क्षेत्र सीमा के बनपुरा के पास है।
यह इलाका कभी घोर नक्सल इलाका माना जाता था। बिना देर किये पुलिस कप्तान सुरेंद्र कुमार झा ने सीआरपीएफ, कोबरा, जगुआर, जैप और जिला बल के अलग-अलग टुकड़ी बनाकर पूरे गांव को घेर लेने का हुकुम दिया। वहीं यह हिदायत दी कि बिना उनके संकेत के गोली नहीं चलानी है। खुद एएसपी दीपक कुमार और अपने बॉडीगार्ड हेमंत सहित कुछ अन्य सहयोगियों को लेकर निकल पड़े। तब उनका हुलिया बिल्कुल गांव वालों जैसा था। गांव पहुंचते ही उनका माथा ठनका।
गांव के कई लोग इधर-उधर दिखाई पड़ रहे थे। ऐसे में मोर्चा लेना घातक था। तब बिना घबराए यह जाबांज आईपीएस बिल्कुल 25 लाख के इनामी माओवादी सुनील मांझी के बगल में सट गया। उसके अगल-बगल में एके-47, इंसास, और एसएलआर लिये उसके सबसे करीबी साथी और 5-5 लाख के इनामी चार्लीस उर्फ शेखर उर्फ दिनेश और सोहन भुइयां खड़ा था। सुनील मांझी तब यह बूझ भी नहीं पाया कि पासा पलटने वाला यह शख्स गिरडीह का पुलिस कप्तान सुरेंद्र कुमार झा है। जाना तब जब उनके मुख से निकले शब्द को सुना। उनके मुख से हौले से सिर्फ इतना ही निकला था कि कोई भी इधर-उधर करने की जुर्रत दिखाई तो ठोक देंगे इसे।
यह सुनते ही उसके सारे साथियों ने हथियार डाल दिये। बिना एक गोली चलाये 15 खूंखार माओवादियों को पकड़ पुलिस कप्तान ने तब खूब वाहवाही बटोरी थी। इनमें 5 महिला माओवादी संजोती हांसदा, गीता बेसरा, बाहमुनी सोरेन, सहित अन्य शामिल थी। इनमें 4 नाबालिग भी थे। उनके पास 1- एके 47, 2 इंसास, 5 एसएलआर, 3 मैगजीन, 4 रायफल, एक बंदूक, वहीं 100 से ज्यादा जिंदा गोलियां समेत कई सामान मिले। एके-47 मुंगेर से लूटी गई थी।
धीर-गंभीर और हंसमुख सुरेंद्र कुमार झा वर्तमान में रांची के सीनियर एसपी हैं। उनकी बहादुरी के ऐसे कई किस्से हैं, जो झारखंड पुलिस फाइल में दर्ज है। 26 जनवरी को मोरहाबादी मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में राज्यपाल रमेश बैस उन्हें यह सम्मान देंगे। वीरता पुरस्कार एएसपी दीपक कुमार, डीएसपी विभाष तिर्की, सिपाही हेमंत कुमार चौधरी, अजीत कुमार और संजीव कुमार सिंह को पुलिस वीरता पदक मिलेगा।
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