Ranchi : जंगली हाथी के हमले में बेतरह घायल इस्तेखार अंसारी की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मेदांता अस्पताल में मौत हो गयी। लगभग 45 साल के इस्तेखार की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपने घर के मुखिया थे। अपने बच्चों का सहारा थे। वह रांची से सटे ओरमांझी थाना क्षेत्र के इरबा में रहते थे। यहां याद दिला दें कि ओरमांझी प्रखंड क्षेत्र में स्थित भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान के हरिजन टोला में दो जंगली हाथी घुस आये थे। हाथियों को वहां से दूसरे स्थान की ओर भगाने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान हाथी ने इरबा के मदरसा मोहल्ला निवासी इस्तेखार अंसारी को दौड़ा लिया और अपनी चपेट में लेकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के बाद घायल इस्तेखार को इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के कारण उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था। लेकिन मंगलवार सुबह जिंदगी और मौत की जंग लड़ते-लड़ते उन्होंने दम तोड़ दिया। इस्तेखार अंसारी अपने पीछे दो पत्नियां और पांच बच्चे छोड़ गये हैं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने अब रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य की बड़ी चिंता खड़ी हो गयी है। इस्तेखार की मौत के बाद परिजनों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाथियों के गांव और आबादी वाले इलाकों में आने के बावजूद उन्हें सुरक्षित तरीके से भगाने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिये पर्याप्त इंतजाम नहीं किये गये। परिजनों ने मृतक के परिवार के किसी सदस्य को वन विभाग में सरकारी नौकरी देने के साथ-साथ विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के बाद बच्चों और दोनों पत्नियों के सामने जीवन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है। ऐसे में सरकार और विभाग को मानवीय संवेदना के साथ परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिये।
हाथी ने छीनी घर की हंसी, पांच बच्चों के सिर से उठा पिता का साया…
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