Kohramlive : पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में आई तल्खी ने सैकड़ों परिवारों की खुशियों पर भी पहरा लगा दिया था। भारत में जिन बेटियों की शादियां तय थीं, उनकी बारात और विदाई का इंतजार लंबा होता चला गया। अब करीब डेढ़ साल बाद उन रिश्तों में फिर से रंग भरने लगे हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत की 150 से ज्यादा युवतियां शादी के लिये भारत पहुंची हैं। इनकी सगाई भारत के अलग-अलग शहरों में रहने वाले युवकों से पहले ही हो चुकी थी। पाकिस्तान से भारत पहुंचीं इन युवतियों की शादियां पुणे, रायपुर, नागपुर समेत कई शहरों में होंगी। इनमें सबसे ज्यादा 15 शादियां नागपुर में होने वाली हैं। शादी के बाद ये युवतियां अपने भारतीय पतियों के साथ ससुराल में रहेंगी। सिंध के हिंदू परिवारों में भारत के साथ वैवाहिक रिश्तों की परंपरा पुरानी रही है। पाकिस्तान में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक है और कई परिवार अपनी बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर भारत को बेहतर विकल्प मानते हैं।
वीजा बंद हुआ तो थम गयीं शादियां
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच आवाजाही और वीजा व्यवस्था पर कड़े प्रतिबंध लागू हुये। अटारी-वाघा बॉर्डर बंद कर दिया गया और पाकिस्तानी नागरिकों के लिये वीजा जारी करने पर रोक लगा दी गयी। पहले से जारी कई वीजा भी रद्द कर दिये गये।इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा, जिनकी बेटियों के रिश्ते भारत में तय हो चुके थे। शादी की तारीखें आगे बढ़ती रहीं और दुल्हनें अपने नये घर की दहलीज तक पहुंचने का इंतजार करती रहीं।
मानवीय आधार पर खुला रास्ता
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से वीजा के लिये प्रयास कर रहे परिवारों को अब राहत मिली है। भारत सरकार ने मानवीय आधार पर सिंधी महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को वीजा जारी करने की अनुमति दी। इस साल अप्रैल से अब तक करीब 150 दुल्हनें और उनके रिश्तेदार भारत पहुंच चुके हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच सीधी उड़ान और वाघा-अटारी रास्ता बंद होने के कारण इन परिवारों को मस्कट, दुबई, श्रीलंका और अन्य देशों के रास्ते भारत पहुंचना पड़ा। इन शादियों का रास्ता खोलने की कोशिश में नागपुर के सिंधी समुदाय के नेताओं की भी भूमिका बतायी जा रही है। झांबिया ने इस मुद्दे को लेकर रायपुर के संत युधिष्ठिरलाल शादानी से संपर्क किया। शादानी सिंध स्थित शादानी दरबार के प्रमुख हैं और भारत में रहते हैं।इसके बाद ऐसी पाकिस्तानी युवतियों की सूची तैयार की गयी, जिनकी सगाई भारतीय युवकों से हो चुकी थी और जो शादी के लिये भारत आने का इंतजार कर रही थीं। यह सूची गृह मंत्रालय को भेजी गयी और युवतियों तथा उनके परिवारों के लिये वीजा की अनुमति मांगी गयी।
एक शर्त ने बदल दिया सफर का रास्ता
गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद परिवारों को भारत आने का रास्ता तो मिला, लेकिन शर्त के साथ। दुल्हनों और उनके परिजनों को हवाई मार्ग से ही भारत आने की अनुमति दी गयी। ऐसे में पाकिस्तान से निकलकर पहले श्रीलंका, मस्कट, ओमान या अन्य देशों का रास्ता लेना पड़ा और फिर वहां से भारत की उड़ान पकड़नी पड़ी। लंबा सफर था, खर्च भी ज्यादा था, लेकिन सामने बेटी की शादी और नये जीवन की उम्मीद थी।
अभी 300 से ज्यादा बेटियां और कर रही हैं इंतजार
150 दुल्हनों को वीजा मिलने से जहां कई परिवारों में शहनाई की तैयारी शुरू हो गयी है, वहीं दूसरी ओर 300 से ज्यादा पाकिस्तानी युवतियां अब भी वीजा का इंतजार कर रही हैं। खबर है कि इन युवतियों की भी भारत में सगाई हो चुकी है और वे अपनी शादी के लिये भारत आने की उम्मीद लगाये बैठी हैं। सिंधी समुदाय की ओर से भारत सरकार से उनके लिये भी मानवीय आधार पर रास्ता खोलने की मांग की गयी है।
पहलगाम हमले के बाद बदल गयी थी पूरी तस्वीर
बीते साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई। इसके बाद भारत ने 6 और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की। 10 मई को दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जतायी, लेकिन इसके बाद भी दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों का असर बना रहा। भारत ने अटारी-वाघा बॉर्डर बंद करने, सिंधु जल संधि को स्थगित करने और पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर रोक जैसे कई फैसले लिये थे। पहले से जारी वैध वीजा भी 27 अप्रैल को रद्द कर दिये गये थे और भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 30 अप्रैल तक लौटने के लिये कहा गया था।







