Hazaribag (Krishna Paswan, Chauparan): 80 साल के नि:संतान बुजुर्ग मेवा ठाकुर की मौत पर सबसे ज्यादा रोया उनका पाला पोसा एक बछड़ा। बछड़े की वफादारी और छलके अनोखे प्यार को देख हर कोई दंग था। मालिक की अंतिम विदाई के वक्त एक दुखी बछड़े के मन को जिसने भी पढ़ा, उनके मुख से सिर्फ इतना ही निकला, निसंतान मेवा ठाकुर के बेटे का फर्ज निभा गया यह छोटा सा बछड़ा। यह नजारा दिखा चौपारण के चैथी गांव में। इस पल का कैद वीडियो खूब वायरल हो रहा है।
गांव के कुछ लोगों के अनुसार चैथी गांव में रहनेवाले 80 साल के मेवा ठाकुर अपनी पत्नी के साथ रहते थे। उनका कोई बाल बच्चा नहीं था। वह एक गाय और बछड़ा रखे थे। उन्हें अपनी संतान की तरह पाला पोसा। खुद उसकी देखभाल करते और प्यार करते। बहुत ज्यादा उन्हें बछड़े से लगाव और जुड़ाव हो गया था। करीब तीन महीने पहले मेवा ठाकुर ने बछड़े को बगल के गांव पिपरो में एक शख्स के हाथ बेच दिया। बीते शनिवार को मेवा ठाकुर की मृत्यु हो गई। ना जाने मालिक की मौत की भनक बछड़े तक कैसे पहुंची और उसे हिला गई। वह भागा-भागा आया और अपने मालिक मेवा ठाकुर की शवयात्रा में शरीक हो गया। इंसानों के बीच आये इस बछड़े को देख कुछ लोग परेशान हो गये। बछड़े को भगाना चाहा, पर वह भागा नहीं। तब शवयात्रा में शामिल कुछ बुजुर्गों ने बछड़े को भगाने से मना कर दिया, बोले, जाने दो इस वफादार को भी। बछड़ा श्मशान घाट तक गया। वहां पार्थिव शरीर को बछड़े ने चूमा और फिर खूब रोया। इतना ही नहीं सजी चिता का फेरा भी लगाया। यह दृश्य देख हर कोई भावुक हो गया। लोगों ने सिर्फ इतना कहा, यह बछड़ा एक बेटे का फर्ज निभा गया।
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