Ranchi/Gumla : कभी पुलिस को नहीं गुदानने वाले खूंखार इनामी खुदी मुंडा उर्फ खुदी जी उर्फ बहादुर जी उर्फ बुढ़ा आज पुलिस के सामने नतमस्तक था। उसने रांची प्रक्षेत्र के डीआईजी अनूप बिरथरे, गुमला के पुलिस कप्तान डॉ. एहतेशाम वकारिब और सीआरपीए कमांडेंट के सामने हथियार डाले। करीब 44 संगीन जुर्म को अंजाम देने वाले बहादुर के सिर पर झारखंड पुलिस ने 5 लाख और NIA ने एक लाख रुपये का इनाम रखा था। बहादुर भाकपा माओवादी संगठन में सब जोनल कमांडर के ओहदे पर था। वह गुमला के करंज थाना क्षेत्र के बटकुरी गांव का रहने वाला है। सरेंडर कर खुद बहादुर ने कहा कि संगठन अपने मकसद से भटक गया है। बेहद कमजोर हो गया है। जनता कट चुकी है। उसने सरकार की सरेंडर पॉलिसि से प्रभावित हो कर हथियार डाला है।
खूंखार नक्सली खुदी मुंडा नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार के इलाकों में ज्यादा एक्टिव रहा। खुदी मुंडा उर्फ बहादुर साल 1996 में संगठन से जुड़ा था। वह अपने नक्सली चचेरे भाई बॉबी मुंडा के लिए सामान पहुंचाता था। साथ ही पुलिस के मूवमेंट की खबर नक्सलियों को देता था। साल 1999 में भाई बॉबी मुंडा के साथ लापुंग में हथियारों की लूटपाट में शामिल रहा। साल 2001 में उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जेल में ही कई उग्रवादियों से उसकी जान पहचान हुई। साल 2005 में वह जेल से बाहर आया। गांव में घरेलू लफड़े के चलते भाकपा माओवादी के कमांडर मनोज नगेसिया तथा सिल्वेस्टर लकड़ा से मिला। इसके बाद संगठन के लिए ताबड़तोड़ कांडों को अंजाम देते चला गया। साल 2008 में बहादुर को पालकोट, कोलेबिरा, सिमडेगा और गुमला इलाके का एरिया कमांडर बनाया गया। 2009 में रिजनल कमांडर सिल्वेस्टर लकड़ा ने उसे पालकोट-सिमडेगा क्षेत्र के सबजोनल कमांडर की जिम्मेदारी दे दी। इस इलाके में 2009 से 2016 तक एक्टिव रहा। इलाके में उसके नाम का आतंक था। 2016 से 2019 तक बूढ़ा पहाड़ सहित अन्य इलाकों में रहा। इस दौरान उसने आईइडी और अन्य बम बनाने की ट्रेनिंग ली। साल 2019 में पालकोट क्षेत्र में संगठन कमजोर हो जाने के कारण पालकोट सिमडेगा क्षेत्र का सब जोनल कमांडर बनाया गया।
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