Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के नरगिर आश्रम में चल रही रामकथा के तीसरे दिन बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने भगवान श्रीराम के अवतरण के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रामावतार वरदानों और श्रापों का संगम था, जिसमें जय-विजय का श्राप, नारद मोह प्रसंग और अनेक ऋषियों की तपस्या की भूमिका रही। स्वामी जी ने कहा, “अहंकार ही पतन का कारण होता है।” नारद मुनि कामदेव को जीतकर अहंकार में आ गए, जिसे प्रभु ने तोड़ा। जीवन का लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति होना चाहिये, सांसारिक लगाव दुःख का कारण है, जबकि प्रभु की भक्ति आनंद का स्रोत।
राम जन्म झांकी निकाली गई, जिसमें श्रद्धालु भजन-कीर्तन पर झूम उठे। कथा समिति अध्यक्ष चंदन जायसवाल ने श्रद्धालुओं के उत्साह को सराहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में जगजीवन बघेल, जयशंकर बघेल, दिलीप पाठक, गौतम शर्मा, अजय राम, पवन बघेल, शुभम चंद्रवंशी सहित अनेक भक्तों ने सहयोग दिया।










