Palamu : पलामू के भरनो प्रखंड की शांत वादियों में तरंगिणी नदी टोली की पगडंडियों पर धूल उड़ाती हुई आज खबर आई कि “हाथी आ गये, 18 हाथियों का पूरा झुंड, लोहरदगा की ओर से।” देखते ही देखते गुमला की हवा में दहशत घुल गई। सुपा गांव के बाहरी हिस्से पर पहुंचते-पहुंचते यह झुंड किसी भयावह पहाड़ी साये की तरह खड़ा हो गया। धान की पकी सुनहरी बालियां हवा में हिल रहीं थीं, पर किसानों का दिल डर से कांप रहा था, कहीं इस साल भी मेहनत की कमाई हाथियों के पैरों तले न रौंदी जाये। गांव की गलियों में एक ही आवाज थी, “सावधान रहियो, हाथी बहुत नजदीक में हैं…” हजारों की भीड़ उमड़ आई, छोटे-बुज़ुर्ग, महिलायें, यहां तक कि स्कूली बच्चे भी। उसी भीड़ को दूर धकेलते हुये पहुंची वन विभाग की टीम। प्रभारी वनपाल राकेश मिश्रा ने चेतावनी दी कि “हाथियों से दूरी बनाकर रखें, ये पलटकर हमला कर सकते हैं, जान बचानी है तो छेड़छाड़ न करें।”
वन विभाग ने राहत की सांस देते हुये कहा कि फसलों का नुकसान हुआ तो भरपाई जरूर होगी। पर ग्रामीण जानते हैं
भरपाई कागज पर हो सकती है, पर गांव की नींद, बच्चों का डर और किसानों की चिंता, इनका कोई मुआवजा नहीं मिलता। फिलहाल 18 हाथियों का यह विशाल झुंड मोरगांव मैदान के पीछे डेरा जमाये बैठा है, रात के अंधेरे में उनकी आवाजें किसी तूफान की तरह गूंजती हैं।
इसे भी पढ़ें : चुनाव जीतने वाले 130 विधायक दागी, किस पार्टी के ज्यादा… जानें
इसे भी पढ़ें : कोयले की कालिख ने मेहनत की लकीरें मिटा दी, कोई सुनने वाला नहीं….






