Hazaribagh(Pooja Banerjee) : हजारीबाग के बड़कागांव के रजहर गांव की मिट्टी, जो कभी हरियाली से महकती थी, आज कोयले की धूल में कराह रही है। सुबह की ताजा हवा हो या शाम की ठंडी बयार, हर ओर बस काले गुबार का साया छाया है। इस साये ने किसानों की उम्मीदों, फसलों और सेहत तीनों पर गहरी चोट कर दी है। गांव वालों की आंखों में एक बुझी हुई चमक है, वे बताते हैं, “बादम क्षेत्र से रोज कोयले से लदे बड़े-बड़े वाहन आते हैं, रजहर में खुलकर, धड़ल्ले से कोयला डंप होता है, वहीं, प्रशासन मौनी बाबा बना हुआ है। हर शिकायत हवा में उड़ गई। ना कोई अधिकारी पहुंचा, ना कोई जांच, ना कोई रोक-टोक। इधर खेतों की हालत ऐसी कि धान की बालियां कोयले की मोटी परत से ढक गई हैं। किसान कहते हैं कि “इस कालिख ने हमारी फसलें मार दीं, हमारी मेहनत की लकीरें मिटा दीं और कोई सुनने वाला नहीं।” रजहर में आज हालात यह हैं कि धूल और दस्त के बीच फसलें दम तोड़ रही हैं, बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक खांसी और सांस की दिक्कत झेल रहे हैं। फिर भी बड़कागांव प्रशासन की चुप्पी कहीं गहरी कहानी कहती है।
ग्रामीणों का डर बढ़ रहा है, अगर यह सिलसिला न रुका तो आने वाले दिनों में रजहर का आसमान और काला होगा,
और गांव बीमारियों से भर जायेगा। लोग उम्मीद लगाये बैठे हैं कि खबर सामने आने के बाद शायद प्रशासन जागे,
थाना हरकत में आये और इस अवैध कोयला डंपिंग पर ब्रेक लगे। वर्ना रजहर गांव की हरियाली, किसानों की मेहनत
और गांव की सांस, सब कुछ कोयले की इस काली परत में हमेशा के लिये दफन हो जायेगा।






