Kohramlive : महंगाई की मार झेल रही आम जनता के लिये एक और अहम खबर है, 1 अप्रैल से देशभर में कई जरूरी दवाइयों की कीमत बढ़ने जा रही है। इलाज की यह बढ़ती कीमत सीधे आम आदमी की रसोई और बजट पर असर डाल सकती है। देश में 767 जरूरी दवाइयों की कीमत बढ़ने जा रही है। दवा निर्माता कंपनियां अधिकतम 0.64% तक कीमत बढ़ा सकेंगी। यह फैसला National Pharmaceutical Pricing Authority ने लिया है। दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर तय हुई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में WPI में 0.64956% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसी आधार पर दवा कंपनियों को कीमत बढ़ाने की अनुमति दी गई है। Drugs (Prices Control) Order, 2013 के प्रावधानों के अनुसार कंपनियां कीमत बढ़ा सकती हैं। इसके लिये सरकार से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। कंपनियां सीधे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में संशोधन कर सकती हैं। यह बढ़ोतरी उन दवाइयों पर लागू होगी जो National List of Essential Medicines में शामिल हैं। इस सूची में लगभग 900 दवाओं के फॉर्मुलेशन शामिल हैं। इनमें दर्द निवारक दवाएं (पेनकिलर), एंटीबायोटिक, एंटी-इन्फेक्टिव दवायें, कई जरूरी जीवनरक्षक दवायें शामिल हैं। बढ़ी हुई कीमतें GST के बिना तय की गई हैं। कंपनियां, थोक और खुदरा विक्रेता सीलिंग प्राइस से ज्यादा कीमत पर दवा नहीं बेच सकते। ऐसा करना कानूनन अपराध माना जायेगा।
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