UP : प्रयागराज के लखरावां गांव की शांत मिट्टी के नीचे एक ऐसा राज दबा था, जिसे सुनकर दिल कांप उठे। 11वीं की छात्रा सपनों से भरी, हौसलों से भरी, 10 नवंबर को स्कूल गई, लेकिन किसे पता था, वह शाम उसके लिये नहीं, उसके कत्ल के लिये लौट रही थी। घरवाले तलाशते रहे, गांव की हर पगडंडी छानी गई, पर वह कहीं नहीं मिली। पांच दिन बाद, थरवई थाना क्षेत्र के एक खेत में मिट्टी की परतों ने उसकी लाश को छुपा रखा था, वहीं, पास ही रखी थीं उसकी किताबें, कॉपी, सिंदूर की डिबिया और एक नाम ‘दीपक’ जो इस पूरी कहानी का खून से लिखा हुआ सच बन चुका था। छानबीन आगे बढ़ी और सामने आया आरोपी हर्षवर्धन सिंह उर्फ दीपक कुमार (26) पंजाब के पटियाला में तैनात एक जवान जिसका चेहरा सोशल मीडिया पर ‘दोस्त’ सा लगता था, पर असलियत में वह एक मासूम को मौत के घाट उतार देने वाला निकला। दोनों की मुलाकात इंस्टाग्राम पर हुई थी। पहले चैट, फिर भावनायें लेकिन उस वर्चुअल दुनिया में सच और झूठ का फासला इतना बड़ा था कि जिंदगी ही बेमानी हो गई।
जब छात्रा को पता चला कि दीपक की शादी 30 नवंबर को तय है, तो उसने पूछा “फिर मुझसे झूठ क्यों बोला? शादी मुझसे ही करोगे।” यही वह मोड़ था, जिसने प्यार को बदनामी दी और एक युवक को हत्यारा बना दिया। पूछताछ में दीपक ने कबूल किया कि “वह शादी तोड़ने को कह रही थी, मैं फंस गया था, इसलिये बहाने से बुलाकर मार दिया।” दीपक ने हत्या के बाद मोबाइल फॉर्मेट किया, यूट्यूब से सीखकर सबूत मिटाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने फोन रिकवर किया, इंस्टाग्राम तो डिलीट था, पर चैट ने राज खोल दिया, “बालसन चौराहे पर मिलो।” यही मैसेज था उस मुलाकात का, जिसने एक बेटी को जिंदगी से छीन लिया। लखरावां की मिट्टी आज भी सिहर उठती है, जब हवा के झोंके उस जगह से गुजरते हैं, जहां एक मासूम के सपनों को मिट्टी में दफन कर दिया गया। यह घटना सिर्फ हत्या नहीं,
सोशल मीडिया की अंधी दोस्ती, झूठे भरोसे और विश्वासघात की चेतावनी है। एक और बेटी, विश्वास का गला घोंटकर
हमेशा के लिए खामोश कर दी गई।




