Ranchi : जिस नौकरी को पाने के लिये सालों की मेहनत लगी, अचानक उसी नौकरी पर संकट के बादल छा गये थे। लेकिन झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश ने JSSC CGL से नियुक्त कर्मियों के चेहरे पर फिर मुस्कान लौटा दी। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा CGL नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। सरकार के फैसले के बाद नौकरी गंवाने की चिंता में डूबे नवनियुक्त कर्मियों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। मामले में अदालत ने नियुक्त कर्मियों से एफिडेविट दाखिल करने को कहा है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि यदि आगे की जांच में कोई अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से दोषी पाया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी उसी की होगी और ऐसी स्थिति में उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। कर्मियों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था और कोर्ट ने उनकी बात सुनी है। यहां याद दिला दें कि 18 अगस्त को राज्य सरकार की कैबिनेट के फैसले के बाद JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया था। इसके बाद नियुक्त कर्मियों के सामने नौकरी जाने का खतरा खड़ा हो गया था। CGL से चयनित कर्मियों का कहना था कि अचानक नियुक्ति रद्द होने से परिवार चलाने से लेकर भविष्य की योजनाओं तक पर संकट आ गया था। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल यह संकट टल गया है।
अब कार्मिक विभाग की चिट्ठी का इंतजार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद चयनित कर्मियों की नजर अब कार्मिक विभाग की आधिकारिक चिट्ठी पर टिकी है। विभागीय आदेश जारी होने के बाद ड्यूटी पर योगदान को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। तब तक राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा और कर्मियों को भी निर्धारित एफिडेविट दाखिल करना होगा।








