Delhi : महात्मा गांधी की लिखी हुई हर पंक्ति अपने आप में इतिहास का एक पन्ना है। उनकी कलम से निकले शब्द आज भी देश और दुनिया को सत्य, अहिंसा और मानवता का रास्ता दिखाते हैं। ऐसे में गांधी से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं की हालिया नीलामी ने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की चिंता बढ़ा दी है। संग्रहालय के निदेशक ए. अन्नामलाई के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, गांधी के पत्र, हस्तलिखित पांडुलिपियां और उनके इस्तेमाल की वस्तुएं केवल किसी परिवार या व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि भारत की साझा विरासत हैं। उन्होंने ऐसी सामग्री को नीलाम करने के बजाय संग्रहालय को सौंपने की अपील की है।
16.20 करोड़ में बिकी गांधी की 688 हस्तलिखित टिप्पणियां
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त को सफरनआर्ट की नीलामी में गांधी से जुड़ी 86 वस्तुयें पेश की गईं। इनमें पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और निजी सामान शामिल थे। सबसे खास रही ‘आज का एक विचार’ नाम की पांडुलिपि। इसमें गांधी की करीब 688 हस्तलिखित टिप्पणियां थीं। बताया गया कि गांधी ने इन्हें अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी के लिए लगभग दो वर्षों के दौरान लिखा था। यह ऐतिहासिक पांडुलिपि 16.20 करोड़ रुपये में बिकी। इसे किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के नीलामी में बिकने की रिकॉर्ड कीमत बताया गया है। खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, नीलामी घर के अनुसार खरीदार भारतीय है और पांडुलिपि देश में ही रहेगी।
संग्रहालय बोला, यह सिर्फ कागज नहीं, इतिहास की सांस है
राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक ए. अन्नामलाई ने नीलामी पर चिंता जताते हुये कहा कि गांधी के कई पत्र और विचार पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं, लेकिन मूल हस्तलिखित दस्तावेजों का महत्व अलग है। उनके मुताबिक, गांधी के हाथ से लिखे मूल दस्तावेज आने वाली पीढ़ियों के लिये ऐतिहासिक धरोहर हैं। आज इनमें से कई वस्तुओं के मालिक गांधी के समय के मूल संग्रहकर्ताओं की तीसरी या चौथी पीढ़ी से हैं। ऐसे में संभव है कि हर कोई इनके ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की जरूरत को पूरी तरह न समझता हो। अन्नामलाई ने कहा कि गांधी के पत्र, पांडुलिपियां और निजी सामान इस देश के इतिहास का हिस्सा हैं। इन्हें इस तरह संरक्षित किया जाना चाहिए कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लोग इन्हें देख सकें, पढ़ सकें और उनसे सीख सकें। उन्होंने उन सभी लोगों से अपील की, जिनके पास गांधी से जुड़ी दुर्लभ सामग्री मौजूद है कि वे उसे बेचने या नीलाम करने के बजाय राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय को सौंपने पर विचार करें। संग्रहालय का कहना है कि इस तरह देश की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखते हुये उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकेगा।
नीलामी में और क्या-क्या बिका?
‘गांधी: आनंद टी. हिंगोरानी के संग्रह से’ नाम से हुई नीलामी में गांधी से जुड़ी कई दुर्लभ वस्तुयें शामिल थीं। गांधी के ईश्वर और भगवद्गीता संबंधी विचारों वाली तीन पांडुलिपियों और पत्राचार का सेट ‘ईश्वर पर संदेश’ 1.68 करोड़ रुपये में बिका। गांधी का ‘पेटी चरखा’ यानी बॉक्स स्पिनिंग व्हील, साथ में कताई की आध्यात्मिक साधना से जुड़े दो पत्र, 1.02 करोड़ रुपये में बिके। इसकी अनुमानित कीमत 50 से 70 लाख रुपये थी। गांधी की हस्ताक्षरित लिखते हुये तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी। आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े पत्र, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का सेट 57.60 लाख रुपये में नीलाम हुआ।
688 टिप्पणियों में गांधी के मन की दुनिया
‘आज का एक विचार’ सिर्फ हस्तलिखित पन्नों का संग्रह नहीं था। इसमें गांधी के चिंतन की पूरी दुनिया दिखाई देती है। इन टिप्पणियों में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता उन्मूलन, प्रार्थना, रामनाम, सेवा, श्रम, भूख, कर्तव्य और स्वराज जैसे विषयों पर विचार दर्ज थे। वहीं, नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा, अनासक्ति, आत्मबोध और ईश्वर की खोज जैसे गहरे विषय भी इन पन्नों में जगह पाये थे। इन हस्तलिखित टिप्पणियों को हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा। नीलामी ने गांधी और आनंद टी. हिंगोरानी के बीच रहे संबंधों की एक निजी झलक भी सामने ला दी।








