कम से कम मरने वालों को तो शांति प्रदान कीजिए
रांची : सोमवार को हाइकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड में मौजूदा हालात को हेल्थ इमरजेंसी जैसा बताया। हाइकोर्ट ने कहा- इसे मजाक में नहीं लिया जाना चाहिए। मुक्तिधाम में लाशों की लाइन पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कम से कम मरने वालों को तो शांति प्रदान करने की व्यवस्था कीजिए।
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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि रंजन की अदालत ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान राज्य के स्वास्थ्य निदेशक और रांची के सिविल सर्जन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। कोर्ट ने सिविल सर्जन को एक बार फिर फटकार लगायी। कोरोना जांच का डाटा सही नहीं देने पर कोर्ट ने आपत्ति जताई है। 5 अप्रैल से 8 अप्रैल तक के जांच रिपोर्ट का एफिडेविट फाइल करने का कोर्ट ने आदेश दिया है। बता दें कि मामले की अगली सुवनाई फिर कल यानी 13 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव, रांची डीसी, रिम्स निदेशक, रांची नगर निगम के अपर नगर आयुक्त और सिविल सर्जन को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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कोरोना की गंभीर स्थिति को लेकर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार कोरोना के पहले फेज से सबक लेकर नहीं चेती।












