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Sunday, August 14, 2022
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आज से Shardiya Navratri आरंभ, जानिये पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

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कोहराम लाइव डेस्‍क : आज से शक्ति की उपासना का महापर्व Shardiya Navratri शुरू हो गया। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना और कलश स्थापना की जाएगी। आज कलश स्‍थापन के लिए तीन महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त है। इस बार Shardiya Navratri के पहले दिन सर्वार्थसिद्धि और तीन राजयोग बन रहा है। इस शुभ योग में नवरात्रि का शुभारंभ बहुत ही शुभ रहने वाला होगा। इस बार नवरात्रि में नवमी तिथि 24 अक्‍टूबर और 25 अक्‍टूबर दो दिन रहेगी।

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ऐसे करें मां शैलपुत्री की उपासना

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री स्वरूप की उपासना होती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इनको शैलपुत्री कहा जाता है। पूर्व जन्म में इनका नाम सती था और ये भगवान शिव की पत्नी थी। सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान कर दिया था, इसी कारण सती ने अपने आपको यज्ञ अग्नि में भस्म कर लिया था।

अगले जन्म में यही सती शैलपुत्री बनी और भगवान शिव से ही विवाह किया। माता शैलपुत्री की पूजा से सूर्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना चाहिए। इससे अच्छा स्वास्थ्य और मान सम्मान मिलता है।

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मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करने की विधि

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के विग्रह या चित्र को लकड़ी के पटरे पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। मां शैलपुत्री को सफेद वस्तु अति प्रिय है, इसलिए मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र या सफेद फूल अर्पण करें और सफेद बर्फी का भोग लगाएं। मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कन्याओं को उत्तम वर मिलता है।

नवरात्रि के प्रथम दिन उपासना में साधक अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और अनेक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। जीवन के समस्त कष्ट क्लेश और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए एक पान के पत्ते पर लौंग सुपारी मिश्री रखकर मां शैलपुत्री को अर्पण करें।

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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है। इस बार प्रतिपदा रात्रि 09:08 तक रहेगी। कलश की स्थापना रात्रि 09:08 के पूर्व की जाएगी। इसके चार शुभ मुहूर्त होंगे। सुबह 07:30 बजे से 09:00 बजे तक। फिर दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक। इसके बाद दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक। फिर शाम 06:00 बजे से 07:30 बजे तक।

देवी का आगमन और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्लपक्ष प्रतिपदा का आरम्भ शनिवार को चित्रा नक्षत्र तथा चंद्रमा के तुला राशि के गोचर काल के समय में हो रहा है। शनिवार के दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा होने से मां दुर्गा का वाहन अश्व होगा और प्रस्थान भैंसे की सवारी पर होगी। 17 अक्‍टूबर को नवरात्रि पर रवियोग, त्रिपुष्कर और सर्वार्थसिद्धि जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे में शुभ कार्य का आरंभ करना और खरीदारी करना शुभ रहेगा।

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