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देखिए.. 22 साल की आयुषी ने खुद को कैसे मिटा लिया

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सबसे नाता तोड़ जिसका थामा था हाथ, उसने ही दिया दगा

रांची : नाजुक उम्र का प्रेम कहां किसी की सुनता है? प्रेम अगर मंजिल पा ले तो भंवर पार, लेकिन प्यार में बेवफाई किसी को भी तोड़ दे। ऐसा ही हुआ एक लड़की के साथ। जिसने प्यार की खातिर घर-बार छोड़ा, परिजनों को रुसवा किया, उसका प्यार ही छलिया निकला। अपने अफसाने को अंजाम से फिसलता जान उस लड़की ने सरेराह खुद को आग लगा ली। बेइंतिहा प्यार के इस भयानक अंत की कहानी जितनी दर्दनाक है, उतनी ही चौंकाने वाली।

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पहली ही मुलाकात में आयुषी को उससे प्यार हो गया। फिर यह प्यार गले की फांस बन गई। जमाने की नजरों से छुपकर उसने अपना घर बसाया। जब कभी आयुषी शादी करने की बात करती तो उसे टाल दिया जाता। कुछ दिन रूको, यह कहकर मना भी लेता था वो। आयुषी ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था उसके नाम। खुद से ज्यादा उसपर यकीन करती थी। आयुषी को उसके घरवालों ने बहुत समझाया बुझाया, पर प्यार के खुमार में अपने भी उसे दुश्मन लगते थे। उसने किसी की नहीं सुनी। उसे बस इंतजार था उस पल का, जब वह दुल्हन बनती और एक चुटकी सिंदूर अपने पिया के नाम का लगाती। आयुषी को तब जोर का झटका लगा, जब उसने सुना कि वह जिसे बेइंतिहा प्यार करती है, वह एक छलिया आशिक है और तीन बच्चों का बाप है। तीन सुनते ही उसने अपनी जिंदगी कर ली 3 से 13। बीच सड़क पर जाकर खुद के बदन पर पेट्रोल डाल माचिस मार ली। भोर के साढ़े पांच बजे उसने ऐसा किया।

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आयुषी की मौत की बात जब फैली तो भागा-भागा उसका भाई अंकित वर्मा मौके पर पहुंचा। बुरी तरह से जली तड़पती-चीखती अपनी बहन को रिम्स ले गया। मरने से पहले आयुषी ने पुलिस को अपना बयान दिया। सारा छुपा राज खोल कर रख दी। इस छलिया आशिक का नाम है दिलीप कुमार। रहता है हरमू में। पेशे से है ठेकेदार। उमर कोई 35 से 40 साल। आयुषी का बयान लिया बरियातू थाना के एएसआई विपिन प्रसाद गुप्त्ता ने। तब मौके पर आयुषी की मां ललिता देवी और मौसी कविता कुमारी भी मौजूद थीं। मां और मौसी के मुख से बस इतना ही निकला कि सबसे नाता तोड़ जिसका थामा था हाथ, उसने ही दगा देकर सजा दी उसकी चिता। सदर पुलिस ने मामला दर्ज  कर दिलीप कुमार को गिरफ्तार कर उसे रांची सेंट्रल जेल भेज दिया है। दिल दहला देने वाली यह वारदात महज सोलह दिन पुरानी है।

इंटर पास आयुषी कुछ अलग करना चाहती थी। इसी सोच को लेकर वह पलामू से रांची आ गई। वह कोकर में एक नर्सिंग होम में नौकरी करने लगी। यहीं उसकी पहली मुलाकात दिलीप कुमार से हुई। दिलीप किसी महिला को लेकर इलाज कराने यहां पहुंचा था। प्यार का खुमार चढ़ा तो ख्वाब मचलने लगे। एक दिन दिलीप ने उससे कहा कि चलो यहां से, मेरे साथ काम करना रिम्स में। दिलीप रिम्स में मेस चलाता था। धीरे-धीरे आयुषी का इश्क परवान चढ़ने लगा। वह सबको छोड़ दिलीप की हो गई। मां-बाप और भाई से लेकर हर करीबी रिश्तेदार ने समझाया, पर उसने किसी की नहीं सुनी और अलग एक कमरा लेकर रहने लगी दिलीप के संग। करीब दो साल बिताने के बाद आयुषी को पता चला कि दिलीप तीन बच्चों का बाप है। उसने दिलीप को खूब खरी-खोटी सुनाई, तब दिलीप ने उसे फिर से मना लिया। आयुषी से कहा, मेरी पत्नी की दिमागी हालत ठीक नहीं। वह पागल है। बहुत जल्द तलाक लेकर उससे शादी कर लेगा। दीन-दुनिया से बेखबर आयुषी एक बार फिर उसकी बातों में आ गई और फिर उसका अंत काफी दुखद हुआ। रिम्स से उसे टीएमएच, टाटा रेफर किया गया, जहां 22 अक्टूबर को वह मर गयी। सारी कहानी सुनते हैं आयुषी के मौसा की जुबानी।

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प्यार में धोखा और बेवफाई की यह दास्तान कोई नयी नहीं है। लड़कियों की भावनाओं को छलने वाले ऐसे किरदार हर शहर में हैं। ऐसी घटनाओं में लड़कियां आसानी से शिकार हो जाती हैं और उनका गलत फायदा उठाया जाता है। ऐसे लोगों से सतर्क रहना और किसी से रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले अच्छी तरह जांच-परख करना ही समझदारी है, वर्ना आयुषी जैसी लड़कियां बेवफाई का शिकार होकर अपनी जान देती रहेंगी।

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