Dhanbad : कभी किताबों के बीच भविष्य तलाशने वाला एक छात्र आगे चलकर माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया। धनबाद के पीके राय मेमोरियल कॉलेज से पढ़ाई करने वाला मिसिर बेसरा आज झारखंड के सबसे चर्चित नाम है। करीब चार दशक तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहे बेसरा पर 2.20 करोड़ रुपये के ईनाम था। CPI (माओवादी) पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा पर 175 मामले दर्ज हैं। 30 जुलाई को उसे दो सहयोगियों के साथ पुलिस रिमांड पर लिया गया था। पुलिस ने 44 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अवधि पूरी होने से पहले ही 12 अगस्त को तीनों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
कॉलेज की पढ़ाई से जंगल तक का सफर
मिसिर बेसरा मूल रूप से गिरिडीह के पीरटांड़ इलाके का रहने वाला बताया जाता है। धनबाद में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और छात्र गतिविधियों से जुड़ा। इसके बाद धीरे-धीरे माओवादी संगठन में उसकी सक्रियता बढ़ती गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बेसरा करीब 40 वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहा और समय के साथ शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। 2007 में उसे पहली बार खूंटी से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2009 में लखीसराय कोर्ट पर माओवादी हमले के दौरान वह छुड़ा लिया गया। इसके बाद उसकी सक्रियता बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा जैसे इलाकों में रही। पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 175 मामले दर्ज हैं। उस पर झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का ईनाम घोषित था। दो मामलों में NIA भी उसकी तलाश कर रही थी। एक आला पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले वह CPI (माओवादी) का सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य था। संगठन के दूसरे शीर्ष नेताओं के सरेंडर या मारे जाने के बाद उसकी गिरफ्तारी को माओवादी नेतृत्व के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है।
तीन AK-47 और 288 गोलियों के साथ पकड़े गये थे
इसी साल बीते 28 जुलाई को बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के बेहचिया गांव के पास पुलिस ने एक वाहन से पांच संदिग्ध माओवादियों को पकड़े जाने की जानकारी दी थी। पुलिस के मुताबिक, उनके पास से तीन AK-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 गोलियां बरामद हुईं। इसके बाद मिसिर बेसरा समेत आरोपियों के खिलाफ UAPA, CLA, Arms Act और BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मिसिर बेसरा के साथ मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण और बीरेन हांसदा उर्फ गौरव को भी पुलिस रिमांड पर लेकर रांची ले जाया गया, जहां राज्य और केंद्र की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ की।
पूछताछ में कई राज उगले
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान नक्सलियों ने कई घटनाओं में अपनी कई वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा पर 175, मोछू पर 137 और बीरेन हांसदा पर आठ मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों के मुताबिक, बेसरा से जुड़े दस्ते पर वर्षों में सुरक्षा बलों पर हमले, हथियार लूटने, पुलिसकर्मियों की हत्या और IED विस्फोट जैसी कई गंभीर घटनाओं में शामिल होने के आरोप रहे हैं। इनमें रांची, हजारीबाग, तोपचांची, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम, गिरिडीह और बिहार के जहानाबाद व लखीसराय समेत कई इलाके शामिल बताये जाते हैं। पुरानी घटनाओं में पुलिस और सुरक्षा बलों से हथियार लूटने के आरोप भी हैं। हाल के वर्षों में सारंडा और छोटानागरा इलाके में सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर IED विस्फोट और फायरिंग की कई घटनाओं में भी बेसरा दस्ते का नाम सामने आया है।
2025 में भी सुरक्षा बलों से कई बार टकराव
2025 में सारंडा और आसपास के जंगलों में माओवादी दस्तों और सुरक्षा बलों के बीच कई मुठभेड़ और IED घटनाएं सामने आईं। मार्च 2026 में भी सारंडा के जंगल में सुरक्षा बलों और मिसिर बेसरा दस्ते के बीच करीब एक घंटे तक गोलीबारी की खबर सामने आई थी, जिसमें बेसरा के बच निकलने की बात कही गई थी। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई है जब माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को लगातार झटके लगे हैं। 21 मई 2025 को नंबला केशव राजू उर्फ बसवराजू मुठभेड़ में मारा गया था, जबकि 22 फरवरी 2026 को पोलित ब्यूरो सदस्य देव के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई थी। संगठन का शीर्ष नेता गणपति भी वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। यही वजह है कि बेसरा की गिरफ्तारी को सिर्फ एक कुख्यात नक्सली की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि माओवादी संगठन के बचे हुये शीर्ष ढांचे पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। मिसिर बेसरा की कहानी में सबसे बड़ा विरोधाभास शायद यही है, जिसने कभी कॉलेज में बैठकर किताबें पढ़ीं, वही आगे चलकर जंगलों में बंदूक के साये में संगठन की कमान संभालता रहा। अब करीब चार दशक लंबे उस सफर का अगला अध्याय जेल की सलाखों के पीछे लिखा जा रहा है। लेकिन उसके खिलाफ दर्ज मामलों की लंबी फेहरिस्त और उनसे जुड़े मुकदमों का अंतिम फैसला अदालतों में होना बाकी है।















