गढ़वा में न्याय की पाठशाला…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के कस्तूरबा बालिका उच्च विद्यालय, हंसकेर परिसर आज न्याय की चेतना से गूंज उठा। मौका था, राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस का और मंच सजा था जन-जागृति के नाम पर। इस विशेष दिन पर आयोजित विधिक जागरूकता एवं साक्षरता कार्यक्रम में छात्राओं और ग्रामीणों को बताया गया कि “न्याय” केवल अदालतों की दीवारों में कैद शब्द नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। इस आयोजन को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) मनोज प्रसाद के मार्गदर्शन और सचिव निभा रंजन लकड़ा के नेतृत्व में दिशा दी गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये निभा रंजन लकड़ा ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 का यही संदेश है कि न्याय अमीर-गरीब में भेद नहीं करता। संविधान का अनुच्छेद 39(ए) हमें यह जिम्मेदारी देता है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी या अज्ञानता के कारण न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने छात्राओं से कहा, अगर कभी आपको लगता है कि न्याय मिलना कठिन है, तो याद रखिये, DLSA आपके साथ है। कार्यक्रम में उपस्थित LADC सुधीर कुमार तिवारी ने विस्तार से बताया कि DLSA कैसे जरूरतमंदों को बिना किसी शुल्क के अनुभवी अधिवक्ताओं की सहायता उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी ताकत है। जब समाज का हर व्यक्ति अपने अधिकार जानता है, तब न्याय की जड़ें और मजबूत होती हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं पैरा लीगल वॉलंटियर मुरली श्याम तिवारी ने छात्राओं से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और दूसरों को भी जागरूक करें। विद्यालय की छात्राओं ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विधिक जानकारी को ध्यान से सुना।

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