UP : झांसी-कानपुर हाईवे पर हुआ दर्दनाक हादसा कई सवाल छोड़ गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक बछड़े को बचाने की कोशिश में तेज रफ्तार क्रेटा कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान अहमद और उसके दोस्त सोनू अहमद की मौत हो गई। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी पप्पू यादव और दीपक यादव ने बताया कि वे हाईवे से गुजर रहे थे। इसी दौरान दीपक ने देखा कि अचानक एक बछड़ा सड़क पर आ गया। उसी समय एक बाइक भी वहां से निकली, जिसे चालक ने संभाल लिया। लेकिन कानपुर की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार बछड़े को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि अंदर बैठा एक युवक दर्द से कराह रहा था और मदद के लिये पुकार रहा था, “मुझे बचा लो…” कार इतनी क्षतिग्रस्त थी कि घायलों को बाहर निकालना मुश्किल हो रहा था। ग्रामीणों ने टायर लीवर और लोहे की रॉड की मदद से कांच तोड़कर किसी तरह घायलों को बाहर निकाला।
मलबे में फंसे थे आबान और सोनू
ग्रामीणों के अनुसार, कार एक तरफ से डिवाइडर से टकराई थी। जिस तरफ टक्कर हुई, उसी ओर बैठे आबान अहमद और सोनू अहमद कार के मलबे में फंस गये थे। ड्राइवर सीट पर बैठे जहद को भी गंभीर चोटें आईं। उसे इलाज के लिये अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई गई। वहीं पीछे बैठे उमर और अहजाम को भी चोटें आईं, लेकिन उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई।
शादी में मिली थी कार, जहद चला रहा था वाहन
जानकारी के अनुसार, कार जहद चला रहा था। बताया जा रहा है कि यह वाहन उसे शादी में दहेज के रूप में मिला था। जहद की सास आबान अहमद की मौसी हैं। कार में आगे की सीट पर जहद के साथ आबान बैठा था, जबकि पीछे सोनू अहमद, उमर और अहजाम बैठे थे।
100 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा थी रफ्तार
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसे के समय कार की रफ्तार काफी तेज थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से चल रहा था। अचानक सामने आये बछड़े को बचाने के प्रयास में चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और हादसा हो गया। ग्रामीणों के हवाले से मीडिया में आई खबर के मुताबिक, घायलों को बाहर निकालने के दौरान पता चला कि कार सवारों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी। हादसे के बाद एयरबैग के काम न करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। पुलिस तकनीकी जांच के जरिये हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। हादसे के बाद झांसी-कानपुर हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने एक लेन को बंद कर वाहनों को दूसरे रास्ते से निकाला। कुछ देर में हाईवे पर करीब 2 से 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिस की व्यवस्था के बाद लगभग आधे घंटे में यातायात सामान्य हो सका। एक बछड़े को बचाने की कोशिश में हुआ यह हादसा कई जिंदगियों को हमेशा के लिये बदल गया।
कार में मिली किताबें, अली के लिये लाया था आबान
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार की तलाशी ली तो उसमें कुछ किताबें मिलीं। खबर है कि ये किताबें नई थीं और अनुमान लगाया जा रहा है कि आबान इन्हें झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद के लिये लेकर जा रहा था। इसके अलावा कार से कुछ अन्य सामान भी बरामद किया गया है।
जनाजे में शामिल होने की मांगी अनुमति
घटना की जानकारी मिलने के बाद अतीक अहमद के चौथे बेटे अहजाम अहमद झांसी पहुंचे। उन्होंने घायलों का हाल जाना और घटना की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से अपील की कि जेल में बंद उनके भाइयों उमर और अली अहमद को आबान के जनाजे में शामिल होने की अनुमति दी जाये। परिवार की ओर से इसके लिये कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।















