Kohramlive : सावन यानी भक्ति का महीना, मंदिरों में गूंजता हर-हर महादेव, शिवालयों में चढ़ता जल और भोलेनाथ के दरबार में उमड़ती आस्था। इस बार सावन भक्तों के लिये एक खास संयोग लेकर आ रहा है। 17 अगस्त सोमवार को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रही है। पंचांग के अनुसार यह श्रावण शुक्ल पंचमी का दिन होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित झा जी के अनुसार, सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग माना जाता है। उनका कहना है कि भगवान शिव के गले में विराजमान नाग देवता की पूजा के साथ भोलेनाथ की आराधना इस दिन को और खास बना देती है।
23 साल बाद फिर बना ऐसा संयोग
पंडित झा जी के मुताबिक, इससे पहले 2003 में सावन सोमवार और नाग पंचमी का ऐसा संयोग बना था। ऐसे में इस बार शिवभक्तों के लिये यह दिन विशेष आस्था का अवसर माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर नाग देवता की पूजा कर सकते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार और नाग पंचमी का संयोग शिव आराधना के लिये विशेष फलदायी होता है।
कालसर्प और नाग दोष से मुक्ति की मान्यता
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या नाग दोष माना जाता है, वे इस दिन विशेष शिव पूजा कर सकते हैं। इसके लिये आटे, तांबे या चांदी से बने सर्प का प्रतीक भगवान शिव को अर्पित कर विधि-विधान से पूजा और आराधना करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कालसर्प दोष जैसी ज्योतिषीय धारणाएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार नहीं हैं।
सुबह से शाम तक पूजा का विशेष अवसर
इस बार नाग पंचमी सोमवार को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार नाग पंचमी 17 अगस्त को है और इसी दिन तीसरा श्रावण सोमवार भी है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय तय कर सकते हैं। सुबह शिवलिंग पर जलाभिषेक से लेकर दिनभर भगवान शिव और नाग देवता की आराधना की जा सकती है। धार्मिक मान्यता में भगवान शिव और नाग देवता का संबंध बेहद खास माना गया है। महादेव के गले में नाग का विराजमान होना इसी आध्यात्मिक प्रतीक का हिस्सा है। ऐसे में सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना भक्तों के लिये शिव और नाग आराधना का दोहरा अवसर माना जा रहा है। सावन सोमवार को वैसे ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऊपर से नाग पंचमी का पर्व होने से इस बार मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी की जा सकती है। भक्त जल, दूध, बेलपत्र, फूल और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगेंगे। सावन की भक्ति, सोमवार की आस्था और नाग पंचमी का पर्व, 17 अगस्त को शिवभक्तों के लिए यह दिन श्रद्धा से भरा खास अवसर बनने जा रहा है।















