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महिलाओं का करिए सम्‍मान, स्‍वर्ग बन जाएगा जीवन

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कोहराम लाइव डेस्क : हर वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस मनाने की परंपरा अब एक सम्‍मान की परंपरा बन चुकी है। बेशक आज के जमाने में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं, जिसमें महिलाओं ने अपनी मेधा और शक्ति का परचम नहीं फहराया हो। भारतीय परंपरा में प्राचीन काल से ही यह शिक्षा दी जाती है कि जिस घर में महिला सम्‍मान होता है, वह स्‍वर्ग बन जाता है। जिन घरों में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है। जहां महिलाओं का अपमान होता है, वह जगह नरक के समान है। यदि पुरुष अपने जीवन में महिलाओं का सम्‍मान करें, तो उनका जीवन स्‍वर्ग बन जाएगा। सुख और शांति की नदी हमेशा बहती रहेगी।

चलिए, आज रूबरू होते हैं भारतीय ग्रंथों में कुछ खास महिलाओं के जीवन से जिनकी प्रेरणा के प्रकाश से समाज का अंधेरा दूर हो सकता है।

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अनसूइया : रामायण में एक दिन श्रीराम और सीता अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचे। वहां अत्रि मुनि की पत्नी अनसूइया ने सीता को स्त्री धर्म समझाया था। अनसूइया को उनके सतीत्व की वजह से पूजनीय माना गया है। अनसूइया ने ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी को अपने सतीत्व के बल से नवजात शिशु बना दिया था। अनसूइया ने यही संदेश दिया है कि स्त्री अपने सतीत्व की शक्ति से पूजनीय बन सकती है।

सीता : रामायण में रावण ने माता सीता का हरण किया था। रावण के इस अधर्म की वजह से ही श्रीराम ने उसके पूरे कुल को नष्ट कर दिया। रामायण का यही संदेश है कि जो लोग महिलाओं का अपमान करते हैं, वे बर्बाद हो जाते हैं।

उर्मिला : उर्मिला का विवाह लक्ष्मण के साथ हुआ था। श्रीराम और सीता के साथ लक्ष्मण भी वनवास गए थे। इस वजह से उर्मिला को पति के बिना 14 वर्षों तक एक संन्यासी की तरह रहना पड़ा। इसी त्याग की वजह से उर्मिला को पूजनीय माना गया है।

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मंदोदरी : मंदोदरी रावण की पत्नी थीं। वह हमेशा अपने पति की भलाई चाहती थीं। सीता हरण के बाद रावण को समझाने की बहुत कोशिश की। कई बार रावण से कहा कि वह सीता को लौटा दें, लेकिन अहंकार की वजह से रावण ने ये बात नहीं मानी और उसका अंत हो गया। मंदोदरी और रावण के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि जीवन साथी की सही सलाह तुरंत मान लेनी चाहिए, वरना सबकुछ खत्म हो सकता है।

द्रौपदी : महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थीं द्रौपदी। दुर्योधन ने हस्तिनापुर के भरे दरबार में द्रौपदी का अपमान किया और इसी अपमान की वजह से उसका पूरा कौरव वंश नष्ट हो गया। महाभारत का संदेश यही है कि महिलाओं का हर परिस्थिति में पूरा सम्मान करना चाहिए।

कुंती : महाभारत में महाराज पांडु की मृत्यु के बाद कुंती ने अभावों में रहते हुए भी पांचों पांडव पुत्रों को अच्छे संस्कार दिए। धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया। कुंती के संस्कारों की वजह से ही सभी पांडव हमेशा धर्म के मार्ग पर चले। श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त की। जो लोग धर्म के अनुसार काम करते हैं, उन्हें ईश्वर की कृपा जरूर मिलती है।

गांधारी : धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन की माता गांधारी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। इसी वजह से उसे अपने पुत्रों के सही-गलत काम दिखाई नहीं दिए। गांधारी का प्रतीकात्मक संदेश ये है कि जो माता पुत्र मोह में आंखों पर पट्टी बांध लेती है और बच्चे के गलत कामों के नजरअंदाज करती है, बच्चों को सही संस्कार नहीं देती है, उसकी संतान का जीवन बर्बाद हो जाता है।

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