Ranchi : झारखंड की ऐतिहासिक रथ यात्रा कल यानी 20 जून को निकाली जायेगी। राजधानी रांची के जगन्नाथपुर मंदिर से हर साल रथ यात्रा निकाली जाती है। रथ यात्रा की पूर्व संध्या पर नेत्रदान की पूजा संपन्न होने के बाद भगवान जगन्नाथ ने भक्तों को दर्शन दिये। नेत्रदान अनुष्ठान में दूर-दूर से लोग आये थे। रथ यात्रा और मेले की पूरी तैयारी कर ली गई है। सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किये गये हैं। जगन्नाथपुर के थानेदार अरविंद कुमार सिंह की देखरेख में तीन शिफ्टों में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। रांची के DC राहुल कुमार सिन्हा और पुलिस कप्तान किशोर कौशल पूर्व में ही पूरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जायजा ले चुके हैं। करीब 519 अतिरिक्त फोर्स लगाये गये हैं। वहीं मेले की सुरक्षा के लिए 16 बैरिकेडिंग बनाए गये हैं। 49 CCTV कैमरे लगाये गये हैं। मेले में सादे लिबास में भी महिला और पुरूष सुरक्षाबल तैनात रहेंगे। गश्ती तेज कर दी गई है।
रथ यात्रा मेले में दूर- दूर से लोग आते हैं, वहीं भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिये भीड़ उमड़ पड़ती है। कई तरह के स्टॉल लगाये गये हैं। झूले और कई तरह के ग्रामीण उपयोग की चीजें स्टॉल में उपलब्ध है। मेले को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। यह मेला लोगों के लिए घूमने लायक होता है। विशेष रथ की ऊंचाई ध्वजा लेकर लगभग चालीस फीट होगी, जो दिखने में काफी भव्य होगा। वहीं चौड़ाई 24 फीट और लंबाई 18 फीट होगी। रथ में हाईड्रोलिक इस्तेमाल होगा ताकि ऊंचाई कम अथवा बढायी जा सके। रांची का जगन्नाथ मेला उड़ीसा के बाद सबसे बड़ा और विशाल माना जाता है। रथ यात्रा के मौके पर कई हस्तियां मौजूद रहती है। इसमें झारखंड के गर्वनर और CM भी पहुंचते हैं। वहीं हजारों की भीड़ उमड़ती है।
इससे पहले आज शाम भगवान जगन्नाथ के नेत्रदान की पूजा संपन्न होने के बाद उनके दर्शन के लिये दरबार खोल दिया गया। नेत्रदान पूजन को लेकर मंदिर के पुजारी ने मीडिया को बताया कि नेत्रदान के दिन भगवान आम लोगों के लिये एकांतवास से बाहर आते हैं। बीते 4 जून को भगवान महास्नान के बाद सीधे एकांतवास में चले गये। करीब 15 दिनों के बाद वह लोगों को दर्शन के लिए फिर से बाहर आते हैं। अब भगवान अपने भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान रात भर दर्शन मंडप में ही रहेंगे वहीं रात्रि विश्राम भी करेंगे। मंगलवार को प्रात: भगवान की पूजा होगी जिसके बाद पट खोल दिए जाएंगे। दिन में पट बंद कर भगवान समेत सभी विग्रहों को रथारूढ़ किया जायेगा। रथ की सजावट और विष्णु लक्षार्चना कर आरती होगी। भक्त रथ को खींचते हुए मौसीबाड़ी ले जायेंगे। भगवान को यहां मंदिर में विराजमान किया जायेगा। मंगल आरती व भोग निवेदन के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जायेगा।
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