Ranchi : जैसी आशंका थी, ठीक वैसा ही हुआ, रांची के पूर्व DC छवि रंजन को ED ने अपनी कस्टडी में ले लिया। गुरूवार को लंबी पूछताछ के बाद IAS छवि रंजन को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के केस में कस्टडी में लिया गया है। उन्हें रात में कस्टडी में लिया गया। वर्तमान में IAS छवि रंजन समाज कल्याण विभाग के डायरेक्टर है। आशंका है कि उन्हें बहुत जल्द निलंबित भी कर दिया जायेगा। राजधानी रांची में जमीन घोटाले में ED ने पूर्व DC छवि रंजन और उनके सबसे खास रसूखदार प्रेम प्रकाश को मास्टरमाइंड माना है। जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी कर इन दोनों पर अकूत काली कमाई करने का इल्जाम है। वहीं राजधानी रांची के एक बड़े बिजनेसमैन भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इस बिजनेसमैन पर पहले भी कई तरह के छोटे-बड़े इल्जाम लग चुके हैं। IAS छवि रंजन को कस्टडी में लेने से पहले ED ने विवादित जमीन की रजिस्ट्री करने वाले सब रजिस्ट्रार घासीराम पिंगुआ से भी लंबी पूछताछ की थी। जमीन के फर्जीवाड़े और गोलमाल करने को लेकर कई पुख्ता सबूत और साक्ष्य जुटाने के बाद ED ने IAS छवि रंजन को रात में गिरफ्तार कर लिया। उनपर जमीन घोटाला और कुछ अन्य पर करोड़ों रुपये वारा-न्यारा करने का इल्जाम है। IAS छवि रंजन के नाते-रिश्तेदारों के खातों में बड़े ट्रांजेक्शन और लाभान्वित होने के सबूत ED को मिले हैं। गिरफ्तार कर लिये जाने की खबर मीडिया में वायरल होने लगी। महिला IAS पूजा सिंघल के बाद IAS छवि रंजन के खिलाफ हुई बड़ी कार्रवाई के बाद से शासन-प्रशासन में खलबली मच गई है। रसूखदार प्रेम प्रकाश के घर के तिजोरी से दो AK 47 हथियार मिलने के मामले में रांची में पदस्थापित एक IPS की भूमिका पर भी नजर हैं। हालांकि ED की तरफ से अबतक उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इससे पहले गुरुवार को दिन के पौने 11 बजे के करीब IAS छवि रंजन ED के दफ्तर में हाजिर हुये थे। उन्हें समन भेज बुलाया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, IAS छवि रंजन जब रांची के DC थे, तब बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कीमती जमीन की खरीद बिक्री की गई। इसमें सबसे प्रमुख बरियातू स्थित सेना की जमीन थी। इल्जाम है कि सेना की 4.55 एकड़ जमीन को फर्जी दस्तावेज के सहारे कोलकाता के प्रदीप बागची ने जगत बंधु टी एस्टेट को बेच दी थी। इस जमीन की सरकारी दर 20 करोड़ 75 लाख 84 हजार 200 रुपये आंकी गई थी, वहीं जमीन महज 7 करोड़ में बेच दी गई। प्रदीप बागची के खाते में केवल 25 लाख रुपये आने के सबूत मिले। बाकी पैसों के भुगतान चेक के जरिये देने की बात डीड में लिखी गई थी, जो जांच में गलत निकली। रांची के सदर थाना क्षेत्र के चेशायर होम में 1 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री में भी गोलमाल करने के साक्ष्य सबूत ED को मिले हैं।
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