Ramgarh : रामगढ़ के रजरप्पा की बेटी श्रेया पंडा ने महज 21 साल की उम्र में स्वदेशी तकनीक से एक ऐसा ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया है, जो आने वाले समय की शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है। इस रोबोट का नाम है सिएना (SIENA) स्मार्ट इंटरेक्टिव एजुकेशनल न्यूरल असिस्टेंट। रजरप्पा की यह बेटी आज पूरे झारखंड का गौरव बन चुकी है। रजरप्पा मंदिर की घंटियों और भक्ति की गूंज के बीच पली-बढ़ी श्रेया ने अपने सपनों को पंख दिये और उन्हें हकीकत में बदलकर दिखा दिया। वह वर्तमान में पैराडॉक्स इनोवेटर प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक एवं मुख्य परिचालन पदाधिकारी (सीओओ) के पद पर कार्यरत हैं। श्रेया, मां छिन्नमस्तिका मंदिर के वरिष्ठ पुजारी एवं मंदिर न्यास समिति के सचिव शुभाशीष पंडा और जया पंडा की बेटी हैं। उनकी इस कामयाबी के बाद पूरे रजरप्पा, रामगढ़ और आसपास के इलाकों में खुशी और गर्व का माहौल है। हर कोई यही कह रहा है, “प्रतिभा को बड़े शहरों की जरूरत नहीं होती, बस सपने बड़े होने चाहिये।”
बचपन की जिज्ञासा बनी कामयाबी की सबसे बड़ी ताकत
श्रेया को बचपन से ही मशीनों, विज्ञान और नई तकनीकों में खास दिलचस्पी थी। जहां दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, वहीं वह यह जानने की कोशिश करती थीं कि कोई चीज काम कैसे करती है। समय के साथ यही जिज्ञासा जुनून में बदली और फिर उसी जुनून ने उन्हें तकनीक की दुनिया में एक अलग पहचान दिला दी। श्रेया द्वारा विकसित सिएना कोई साधारण रोबोट नहीं है। इसे खास तौर पर शिक्षा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह रोबोट विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी देने में सक्षम है। स्कूलों और कॉलेजों में यह एक डिजिटल शिक्षक और स्मार्ट सहायक की भूमिका निभा सकता है।
फेस पहचानने से लेकर हर काम में माहिर
सिएना अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। इसकी कई खास खुबियां बताई गई। जैसे, फेस रिकग्निशन से उपस्थिति दर्ज करना, कई भाषाओं में संवाद करने की क्षमता, छात्रों के सवालों का जवाब देना, लिडार नेविगेशन सिस्टम, वॉइस इंटरैक्शन तकनीक, टच स्क्रीन इंटरफेस, इंटेलिजेंट मेमोरी सिस्टम यानी यह रोबोट स्मार्ट क्लासरूम की नई पहचान बनने की पूरी क्षमता रखता है। सिएना को तैयार करने में श्रेया ने लगभग छह महीने तक लगातार मेहनत की। डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग, हार्डवेयर इंटीग्रेशन और कई दौर के परीक्षण के बाद यह रोबोट तैयार हुआ। इस सफर में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
‘मां-बाप और गुरुओं का आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत’
अपनी सफलता का श्रेय श्रेया अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं। श्रेया ने मीडिया से कहा कि परिवार ने कभी उनके सपनों पर रोक नहीं लगाई। हर मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आज श्रेया की कहानी झारखंड ही नहीं, देशभर की बेटियों को यह संदेश दे रही है कि विज्ञान और तकनीक की दुनिया में महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। उनका मानना है कि आने वाला समय महिलाओं के नवाचार, नेतृत्व और तकनीकी योगदान का होगा। श्रेया का सपना केवल रोबोट बनाना नहीं है। उनकी योजना ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की है। इसके लिये वह भविष्य में नि:शुल्क रोबोटिक्स प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम शुरू करना चाहती हैं। उनका विश्वास है कि गांव और छोटे कस्बों की बेटियों को सही अवसर मिल जाये तो वे दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकती हैं।
इसे भी पढ़ें : गढ़वा के बैंकों पर DC सख्त, बोले लाभुक तक योजना पहुंचे, तभी…
इसे भी पढ़ें : अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर होगा कड़ा एक्शन…
इसे भी पढ़ें : CBSE को मिला नया मुखिया, ये सीनियर IAS संभालेंगे कमान…
इसे भी पढ़ें : शादीशुदा महिला से प्यार, पुलिस ने खोला सनसनीखेज राज…
इसे भी पढ़ें : राजधानी रांची में चली गो’ली, दो साल पहले भतीजा मा’रा गया, अब चाचा को दागी गो’ली…






