Ranchi : झारखंड में ट्रेजरी के जरिये हुई अवैध निकासी के मामले ने अब और बड़ा रूप ले लिया है। सरकारी फाइलों के बीच दबे एक-एक दस्तावेज अब बड़े राज खोल रहे हैं। पहले बोकारो, हजारीबाग और देवघर तक सीमित जांच अब राजधानी रांची, रामगढ़ और पश्चिमी सिंहभूम यानी चाईबासा तक पहुंच गई है। राज्य सरकार ने इन जिलों में सामने आये करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच भी हाई लेवल कमिटी को सौंप दी है। गठित आठ सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति अब पूरे मामले की गहराई तक जायेगी। इस कमिटी की कमान उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल के हाथों में है। वित्त विभाग ने समिति को साफ निर्देश दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर हुई गड़बड़ियों की जांच हो, सॉफ्टवेयर सिस्टम की कमजोरियां खंगाली जायें और यह पता लगाया जाये कि आखिर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये कैसे निकलते रहे।
रांची और रामगढ़ के पशुपालन कार्यालय बने जांच के केंद्र
प्रारंभिक जांच में सबसे चौंकाने वाली बातें पशुपालन विभाग से जुड़ी सामने आई हैं। रांची के कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन और रामगढ़ जिला पशुपालन कार्यालय में वेतन और अन्य सरकारी मदों के नाम पर कथित फर्जी निकासी का बड़ा खेल पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर सरकारी पैसे निकाले गये। मामला सामने आने के बाद संबंधित थानों में FIR दर्ज की जा चुकी है। पुलिस कार्रवाई में कुछ सरकारी कर्मियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
चाईबासा में भी करोड़ों की निकासी का शक
पश्चिमी सिंहभूम यानी चाईबासा जिले में भी सरकारी धन की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद चाईबासा उपायुक्त ने मामले में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की है। यह मामला कई जिलों में फैले बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है।
अब बैंकों की भूमिका भी जांच के घेरे में
सरकार की हाई लेवल कमिटी सिर्फ सरकारी बाबुओं तक सीमित नहीं रहेगी। जांच का बड़ा फोकस बैंकों की भूमिका पर भी रहेगा। कमिटी यह पता लगायेगी कि फर्जी निकासी के पैसे किन खातों में गये, बैंक स्तर पर क्या जांच हुई और आखिर इतनी बड़ी रकम क्लियर कैसे होती रही।
सॉफ्टवेयर सिस्टम पर भी उठे सवाल
जांच में “कुबेर”, “ई-कल्याण” और “जेकैप्स” जैसे सरकारी सॉफ्टवेयर सिस्टम भी जांच के घेरे में आ गये हैं। सरकार यह समझना चाहती है कि क्या सिस्टम में ऐसी तकनीकी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर जालसाजों ने करोड़ों रुपये निकाल लिये? कमिटी यह भी जांचेगी कि बिल पास कराने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर चूक हुई।
सरकार की चिंता
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब रिकवरी को लेकर खड़ा हो गया है। सरकार यह जानना चाहती है कि अवैध तरीके से निकाली गई राशि वापस कैसे लाई जाये, दोषियों पर क्या कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाये। इसी को लेकर समिति तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश भी देगी।
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