UP : यूपी के महूबा जिले के कबरई थाना क्षेत्र के खरका गांव में पारिवारिक तकरार, सामाजिक उपेक्षा और अंदर ही अंदर सुलग रहे अपमान ने ऐसा खूनी रूप लिया कि एक चचेरे भाई ने दूसरे को ट्रैक्टर से कुचलकर मार डाला और फिर खुद भी फंदे से लटक गया। केवल 12 घंटे के भीतर गांव ने दो लाशें देखीं और पूरे इलाके में कोहराम मच गया।
एक घर में जन्मदिन का जश्न, दूसरे में बेटी की शादी की पार्टी
बीती रात गांव में दो घरों में खुशियां थीं। एक तरफ पुन्ना प्रजापति के बेटे संदीप की बेटी का जन्मदिन मनाया जा रहा था। घर के बाहर DJ बज रहा था। बच्चे, महिलाएं और रिश्तेदार नाच-गा रहे थे। दूसरी ओर, विश्वमूर्ति प्रजापति अपनी बेटी संध्या की शादी के बाद की पार्टी दे रहा था। संध्या की शादी बीते 7 मई को हुई थी और विदाई के बाद यह पहला बड़ा कार्यक्रम था। लेकिन विश्वमूर्ति के दिल में एक टीस चुभ रही थी। उसके घर पर गांव के कुछ लोग और सहेलियां तो पहुंचीं, मगर अपने ही परिवार के लोग नहीं आये। सारे रिश्तेदार संदीप के यहां जन्मदिन की पार्टी में मौजूद थे। बस, यही बात विश्वमूर्ति को अंदर तक तोड़ गई।
…और फिर शुरू हुआ मौत का खेल
रात करीब 11 बजे विश्वमूर्ति शराब के नशे में संदीप के घर पहुंच गया। बीच सड़क पर गाली-गलौज शुरू कर दी। लोगों ने किसी तरह समझाकर उसे वहां से हटा दिया। लेकिन उसके भीतर अपमान की आग धधक रही थी। कुछ देर बाद वह अपना बड़ा ट्रैक्टर लेकर लौटा। और फिर जो हुआ, उसने पूरे गांव की रूह कंपा दी। गुस्से में अंधा हो चुका विश्वमूर्ति तेज रफ्तार में ट्रैक्टर लेकर आया और दरवाजे के सामने खड़े अपने चचेरे भाई मंगल प्रजापति और भतीजे संदीप पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। चीखें गूंज उठीं, लोग भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लगभग 49 साल के मंगल प्रजापति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, संदीप बेतरह घायल होकर तड़पता रहा। गांव वालों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत नाजुक होने पर झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वारदात के बाद आरोपी ट्रैक्टर लेकर अंधेरे में फरार हो गया।
परिवार की पुरानी रंजिश ने छीनी दो जिंदगियां
इस पूरे मामले के पीछे सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी पारिवारिक दरार भी सामने आई। मृतक मंगल की पत्नी मुन्नीदेवी ने पुलिस को बताया कि विश्वमूर्ति ने परिवार के ही एक व्यक्ति की पत्नी को अपने घर में रख लिया था। इसी बात को लेकर परिवार और समाज में उससे दूरी बना ली गई थी। लोग उसके घर के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते थे। बेटी की शादी की पार्टी में भी जब अपने लोग नहीं पहुंचे, तो वह यह अपमान सह नहीं सका और फिर रिश्तों की नाराजगी खून में बदल गई।
हत्या के बाद जागा पछतावा
रात में खून से हाथ रंगने वाला विश्वमूर्ति शायद सुबह तक टूट चुका था। कानून का डर, समाज की बदनामी और अपने ही भाई की मौत का बोझ, इन सबने उसे भीतर से खत्म कर दिया। शुक्रवार दोपहर गांव के रामपाल सिंह के खेत में बने सुनसान मकान में उसका शव रस्सी के फंदे से लटका मिला। खेत की तरफ गये ग्रामीणों ने जब यह दृश्य देखा तो उनके होश उड़ गये। जिस आदमी ने रात में मौत बांटी थी, वह खुद भी मौत को गले लगा चुका था। जश्न वाले घरों में अब सिर्फ चीखें हैं। जहां रात में DJ बज रहा था, वहां अब दुखदायी माहौल है। बेटी की खुशियों वाले घर में अब सिसकियां हैं और जन्मदिन वाले आंगन में खामोशी। गांव में हर आंख नम है। इधर, घटना की सूचना मिलते ही कबरई पुलिस और फॉरेंसिक टीम के मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों घटनास्थलों से साक्ष्य जुटाये हैं।
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