Ranchi : झारखंड की सांझ आज एक नई कहानी लिख रही है। फैक्ट्रियों की मशीनों के बीच अब महिलाओं की हंसी भी गूंजेगी, वो भी रात की नीरवता में। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कारखाना (झारखंड संशोधन) विधेयक 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है, और इसी के साथ टूट गया वह पुराना बंधन, जो महिलाओं को रात 7 बजे के बाद फैक्ट्री की देहरी लांघने से रोकता था। अब, सहमति और सुरक्षा के साये में, महिलाएं रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम कर सकेंगी। टाटा स्टील की भट्टियों से लेकर बोकारो स्टील की चमक तक, अडाणी पावर के जनरेटर से लेकर एसीसी सीमेंट के धूल-धुएं तक, हर जगह उनके हाथों का हुनर और भी उजले रंग भरेगा। पड़ोसी राज्यों से आगे निकलकर झारखंड ने न सिर्फ एक कानून बदला है, बल्कि महिलाओं के सपनों को नई उड़ान दी है। वो उड़ान, जो रात के अंधेरों को भी अपने उजाले में बदल दे।
हालांकि यह रात की पारी हर किसी पर थोप दी जाने वाली मजबूरी नहीं होगी। यह तभी शुरू होगी, जब महिला खुद अपनी सहमति देगी। और तब, फैक्ट्री मालिक पर यह जिम्मेदारी होगी कि वह सुरक्षा, अवकाश और कार्य घंटों से जुड़ी हर शर्त को बखूबी निभाए। राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन के बाद ही यह नई व्यवस्था लागू होगी।
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