Ranchi : सोमवार की सुबह झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र जैसे ही शुरू हुआ, उससे पहले लोकतंत्र ने सदन के बाहर अपना असली रंग दिखाया। एक ओर सत्ता पक्ष, दूसरी ओर विपक्ष – दोनों अपने-अपने झंडे, नारों और मुद्दों के साथ विधानसभा परिसर को रणभूमि में बदल चुके थे।
सत्ताधारी दल – झामुमो, कांग्रेस, राजद और माले एकजुट होकर संविधान में प्रस्तावित 130वें संशोधन और बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ मैदान में उतर गये। उनके सुरों में गुस्सा था और आंखों में सवाल। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप और झामुमो विधायक समीर मोहंती ने केंद्र की नीतियों पर सीधा निशाना साधा। समीर मोहंती ने तो कहा, “ये बदलाव संविधान की आत्मा से छेड़छाड़ है, जिसे झारखंड कभी स्वीकार नहीं करेगा।”
वहीं दूसरी ओर, भाजपा के विधायकों ने रिम्स-2 अस्पताल निर्माण को लेकर कांके-नगड़ी के आदिवासी आंदोलन और सूर्या हांसदा एनकाउंटर केस को लेकर सरकार को घेरा। हाथों में तख्तियां थीं और नारों में जनजातीय अस्मिता की आवाज। भाजपा विधायकों का आरोप था कि सरकार रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की उपजाऊ जमीन छीन रही है, और विरोध करने वालों पर पुलिस का डंडा चला रही है। वहीं सूर्या एनकाउंटर को उन्होंने “फर्जी” करार देते हुये CBI जांच और दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग की।
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