विचाराधीन कैदियों की रिहाई प्रक्रिया तेज करने का पीएम ने न्‍यायपालिका से किया आग्रह

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Kohramlive Desk : PM नरेंद्र मोदी ने न्यायपालिका (Judiciary) से शनिवार को आग्रह किया कि वह विभिन्न कारागारों में बंद एवं कानूनी मदद का इंतजार कर रहे विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) की रिहाई प्रक्रिया में तेजी लाए। पीएम मोदी अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की पहली बैठक को संबोधित कर रहे थे। पीएम ने कहा कि व्यवसाय की सुगमता और जीवन की सुगमता जितनी महत्वपूर्ण है, न्याय की सुगमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नागरिकों का न्यायपालिका पर बहुत भरोसा है और किसी समाज के लिए न्याय प्रणाली तक पहुंच एवं न्याय दिया जाना समान रूप से जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस मामले में एक अभियान शुरू किया है। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से इस प्रयास में और अधिक वकीलों को जोड़ने का आग्रह किया। शनिवार को शुरू हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में मोदी और सीजेआई एवी रमना के के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश यूयू ललित एवं न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़़, विधि मंत्री किरेन रीजीजू और विधि राज्य मंत्री एसपीएस बघेल भी मौजूद थे। इस दौरान उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (एसएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष और डीएलएसए के अध्यक्ष भी उपस्थित थे।

मुहिम से अधिक वकीलों को जोड़ें

मोदी ने कहा कि जिला न्यायाधीश विचाराधीन मामलों की समीक्षा संबंधी जिला-स्तरीय समितियों के अध्यक्ष के रूप में विचाराधीन कैदियों की रिहाई में तेजी ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने विचाराधीन कैदियों की रिहाई संबंधी मुहिम चलाने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की सराहना की और बार काउंसिल ऑफ इंडिया से इस प्रयास में और अधिक वकीलों को जोड़ने का आग्रह किया।

4,88,511 कैदियों में 3,71,848 कैदी विचाराधीन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा 2020 में प्रकाशित ‘जेल सांख्यिकी भारत’ रिपोर्ट के अनुसार, जेल में 4,88,511 कैदी हैं, जिनमें से 76 प्रतिशत या 3,71,848 कैदी विचाराधीन हैं। पीएम ने कहा कि पिछले आठ साल में देश के न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेज गति से काम किया गया है। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय प्रौद्योगिकी में भारत के नेतृत्व को रेखांकित करते हुए जोर दिया कि न्यायिक कार्यवाहियों में और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘ई-कोर्ट मिशन’ के तहत देश में डिजिटल अदालतें शुरू की जा रही हैं। अदालतों ने यातायात उल्लंघन जैसे अपराधों के लिए चौबीसों घंटे काम करना शुरू कर दिया है। लोगों की सुविधा के लिए अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंस संबंधी बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया जा रहा है।’

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से एक करोड़ मामलों की सुनवाई

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक करोड़ से अधिक मामलों की सुनवाई हो चुकी है। उन्होंने कहा, ‘इससे साबित होता है कि हमारी न्यायिक प्रणाली न्याय के प्राचीन भारतीय मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध होने के साथ ही 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुसार स्वयं को ढालने के लिए तैयार है।’

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