Kohramlive Desk : आजादी की 75वीं सालगिरह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से नौंवी बार तिरंगा फहराया। उन्होंने 83 तक देश को संबोधि किया। प्रधानमंत्री ने देश की विविधता पर गर्व करने की अपील की। अपने संबोधन के दौरान पीएम ने अगले 25 सालों के लिए पांच प्रण पर जोर दिया। विकसित भारत का प्रण लिया। पीएम के भाषण के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं-
नेहरू-सावरकर का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने कहा, हिंदुस्तान का कोई कोना, कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैंकड़ों सालों तक गुलामी के खिलाफ जंग न की हो। जीवन न खपाया हो। यातनाएं न झेली हो। आहुति न दी हो। आज का ये दिवस ऐतिहासिक है। पीएम ने कहा, यह देश कृतज्ञ है मंगल पांडे, तात्या टोपे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, असफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे ऐसे अनगिनत क्रांति वीरों का, जिन्होंने अंग्रेजों की हुकूमत की नींव हिला दी थी। आजादी की जंग लड़ने वाले और आजादी के बाद देश बनाने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी, नेहरू जी हो, सरदार वल्लभ भाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल बहादुर शास्त्री, दीन दयाल उपाध्याय, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, आचार्य विनोबा भावे, वीर सावरकार, नाना जी देशमुख ऐसे अनेक महापुरुषों को आज नमन करने का अवसर है।
भारत लोकतंत्र की जननी
पीएम मोदी ने कहा, भारत की विविधता ही भारत की शक्ति है। भारत की हर भाषा पर हमें गर्व होना चाहिए। भले ही वह भाषा हमें आती हो या न आती हो, लेकिन हमें गर्व होना चाहिए कि हमारे पुरखों ने वह भाषा हमें दी है। 130 करोड़ देशवासियों में एकता। उन्होंने कहा, भारत लोकतंत्र की जननी है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। जिनके जहन में लोकतंत्र होता है, वे जब संकल्प करके चल पड़ते हैं तो उनका सामर्थ्य दुनिया की बड़ी-बड़ी सल्तनतों के लिए भी संकट का काल लेकर आता है।
दुनिया का बदल रहा नजरिया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आजादी के इतने दशकों बाद पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नजरिया बदल चुका है। विश्व, भारत की तरफ गर्व और अपेक्षा से देख रहा है। समस्याओं का समाधान दुनिया, भारत की धरती पर खोजने लगी है। विश्व का ये बदलाव, विश्व की सोच में ये परिवर्तन 75 साल की हमारी यात्रा का परिणाम है।
25 सालों के लिए पांच प्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जब हम 2047 में देश की आजादी के 100 साल पूरे करेंगे तो हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के सभी सपनों को पूरा करने का प्रण लें। उन्होंने कहा, अगले 25 साल देश के बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमें पंच प्रण की शक्ति पर ध्यान केंद्रित करना होगा। ये पंच प्रण हैं-
1.विकसित भारत
2.गुलामी से मुक्ति
3.विरासत पर गर्व
4. एकता और एकजुटता
5. नागरिकों का कर्तव्य
भष्ट्राचार और भाई-भतीजावाद
प्रधानमंत्री ने कहा, हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ना होगा। हम एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं। बड़े-बड़े लोग बच नहीं पाएंगे। मैं लाल किले की प्राचीर से बड़ी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं। भ्रष्टाचार दीमक की तरह देश को खोखला कर रहा है। मुझे इसके खिलाफ लड़ना है। मैं आज आपसे साथ मांगने आया हूं। आपसे सहयोग मांगने आया हूं। जिन्होंने देश को लूटा, उन्हें लौटाना होगा। भाई-भतीजावाद पर चोट करते हुए उन्होंने कहा, लोग सोचते हैं कि मैं सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र की बात करता हूं। हिंदुस्तान की हर संस्था में परिवारवाद है। इसके कारण मेरे देश के टैलेंट को नुकसान होता है। सामर्थ्य को नुकसान होता है, जिनके पास अवसर की संभावनाए हैं, वो भाई-भतीजावाद के कारण बाहर रह जाता है। भाई-भतीजावाद के खिलाफ नफरत पैदा करनी होगी। परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है, देश के लिए नहीं। आइए, हिंदुस्तान की राजनीति व सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए इससे मुक्ति दिलाकर आगे बढ़ें।
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