Ramgarh : रजरप्पा की शांत घाटियों में, भैरवी नदी के किनारे, जहां कभी सूरज की पहली किरण खेतों को हरियाली देती थी, अब वहां धुएं की कालिख ने सब कुछ निगल लिया है। भुचुंगडीह के जंगल में कोयले की एक अवैध सुरंग, जिसे कुछ लालच ने गढ़ा और सिस्टम की चुप्पी ने सींचा। वहीं, जलती आग की भट्ठी में जिंदा समा गया एक बेकसूर मजदूर — रविन्द्र महतो। रविंद्र, खोखा गांव का एक मेहनती बेटा था। रात के अंधेरे में पाइप लेकर वो आग बुझा रहा था, पर अचानक जमीन धंसी और वो उस जलते हुये नरक में समा गया। प्रत्यक्षदर्शी गांधी महतो की आवाज कांपती है, “हम चिल्लाये, दौड़े, पर आग… आग तो जैसे किसी की सुनती ही नहीं।” ये कोई पहली बार नहीं था, एक महीने से सुलग रही थी जमीन, प्रशासन को खबर थी, नेताओं ने दौरे किये, लेकिन आग पर पानी डालने से पहले सिस्टम ने जिम्मेदारी पर राख डाल दी। घटना की खबर मिलते ही CCL और पुलिस पहुंची, पर देर हो चुकी थी। गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा, “अगर एक महीना पहले ध्यान दिया गया होता, तो आज रविन्द्र हमारे बीच होता।” रामगढ़ DC चंदन कुमार, SP अजय कुमार और विधायक ममता देवी मौके पर पहुंचे। पर आंखों में आंसू लिये खड़ी मां पूछती है, “मुआवजे से क्या उसका बेटा वापस आ जायेगा?” माइंस रेस्क्यू की टीम लगी है, पर अब तक कोई सुराग नहीं। रविन्द्र की पत्नी, उसकी छोटी बच्ची और उसके बूढ़े मां-बाप बस रोते रहे।
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