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टूटे हाथ की बोली लगाई 4 लाख, यहां केवल 49 हजार में हो गया ऑपरेशन

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Ranchi (Pawan Thakur/Sanjay) : ”ऊ दिनवा याद कर ही कलेजवा फटने लगता है, पूरा खून से सना था मेरा बेटवा। उकरा देख के ही मुखवा से उस रोज निकला, अरे बाप रे बाप, अब का होई…एक पुलिस वाला थप्पड़ भी मारा, गाली भी बका, पर किसी तरह बेटवा को लेकर बख्तियारपुर हॉस्पिटल पहुंचे। वहां से PMCH रेफर कर दिया। पूरा 20 दिन बेटवा कोमा में रहा। कौनो आदमी को नहीं पहचानता था, बस टुकुर-टुकुर देखते रहता था। मथवा में खूब चोट लगा था, दाहिना हाथ भी टूट गया था। जब पूरा होश आया तब बेटवा बोला दाहिना हाथ बिल्कुल काम नहीं कर रहा। ना हाथ उठता था और ना घूमता है। दर्द के मारे तड़प उठता था। कई हॉस्पिटल गये, प्राइवेट डॉक्टर के पास गये, पर बेटवा का हाथ देख डॉक्टर लोग अपना फीस लौटा देते थे, बोलते थे… इसके हाथ को ठीक करने के लिये दो डॉक्टर की जरूरत पड़ेगी। एक हड्डी और दूसरा प्लास्टिक सर्जन। बिहार और झारखंड में जल्दी कोई डॉक्टर रिस्क नहीं लेगा, इसे दिल्ली ले जाना होगा। इलाज तो कराना था, बेटवा से बढ़कर पैसवा नहीं था। बेटवा भी उदास रहने लगा था। उसे लोग लूल्हा बोल चिढ़ाने भी लगे थे, किसी से पता चला रांची में एक डॉक्टर बाबू के बारे में। भला हो डॉक्टर एकांश देबुका का, वो फरिश्ता बन कर आये और मेरा बेटवा का हाथ ठीक करने का जिम्मा ले लिये। 2 रोज टेस्ट वगैरह हुआ। तीसरा दिन ऑपरेशन हो गया। अब बेटवा भी बहुत खुश है, बोलता है मां, अब हम अपाहिज नहीं, तूझे इसी हाथ से कमा कर खिलायेंगे। उसके मुंह से यह बात सुन मन को बहुत सुकून मिला, मन गदगद हो गया।” यह कहना है राहुल की मां रूनिता देवी का।

पटना के चंपापुर में रहनेवाले रूनिता देवी के पति कारू राय पेशे से मजदूर हैं, उनकी माली हालत बहुत बढ़िया नहीं है। इस परिवार का कहना है कि दूसरे हॉस्पिटल में तीन से चार लाख ऑपरेशन का खर्च हो जाता, यहां रांची के देबुका नर्सिग होम में 40 से 50 हजार के खर्च में ही सबकुछ हो गया। वहीं राहुल का ऑपरेशन करने वाले डॉ एकांश देबुका ने कहा कि, दो रोज तक यहीं सोचता रहा कि रिक्स ले या नहीं। पता नहीं कहीं कोई तोहमत नहीं लग जाये। बाद में दिल से आवाज आई कि 19 साल के इस जवान लड़के का इलाज करना चाहिये। क्या इतने कम खर्च में इलाज किया जा सकता है? इंसानियत के नाते यह सोचना गलत होगा। रिक्स लिया तो सुकून मिला। अब राहुल अपने हाथ से हर काम कर सकता है। केवल भारी सामान उठाने में उसे तीन से चार माह का समय लग सकता है… सुनें क्या बोली राहुल की मां रूनिता देवी, राहुल और डॉ एकांश देबुका तथा डॉ दिनेश ठाकुर…

इसे भी पढ़ें : बिना चीर-फाड़ के खतरनाक जगह फंसा सिक्का यूं निकाल गये डॉ जयंत घोष… देखें वीडियो

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