Ranchi : झारखंड की सड़कों पर अब रफ्तार की नई कहानी लिखी जा रही है। उन ऊबड़-खाबड़ रास्तों, धूल से अटी पगडंडियों और समय से पीछे छूटती सड़कों को एक नया जीवन देने के लिये, मुख्य सचिव अलका तिवारी ने कमान संभाली है। बुधवार की शाम, जब सूरज अपनी लालिमा समेट रहा था, तब रांची के प्रशासनिक गलियारों में विकास की यह नई गाथा लिखी जा रही थी। बैठक में अलका तिवारी की आवाज में दृढ़ता थी—”योजनाएं लाना जितना कठिन होता है, उन्हें समय पर पूरा करना उससे भी बड़ी चुनौती होती है। हम झारखंड के हर कोने को सड़कों के जरिये जोड़ेंगे, लेकिन इसके लिये सभी बाधाओं को दूर करना होगा।”
इस निर्माण यात्रा में सबसे बड़ी अड़चन थी जमीन के कागजात। कई इलाकों में वर्षों पुरानी जमीनों पर मालिकाना हक के दस्तावेज अब भी उलझे हुये हैं, जिससे मुआवजा भुगतान में देरी हो रही थी। समाधान भी सामने आया—”जहां दस्तावेज नहीं, वहां सरकारी मानकर निर्माण शुरू करो। बाद में कागज मिलते ही हकदारों को उनका अधिकार मिलेगा।” वन विभाग की स्वीकृति हो या विधि-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां, हर मुश्किल का हल तलाशने के निर्देश दिये गये। ज़िलों के DC को कहा गया कि वे इन परियोजनाओं पर लगातार नजर रखें और किसी भी समस्या को समय रहते सुलझायें।
झारखंड में दौड़ेंगी नई सड़कें
झारखंड की जमीन पर 3,536 किलोमीटर की राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना आकार ले रही है। 52,476 करोड़ रुपये की लागत से 1,758 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो रहा है, जिनमें से 718 किलोमीटर पहले ही पूरा हो चुका है। 503 किलोमीटर लंबी 15 सड़कों पर 17,188 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य तेजी से जारी है। झारखंड की मिट्टी में नई ऊर्जा भरने की तैयारी जोरों पर है। एक अधिकारी का कहना है कि जब सड़कें बनेंगी, तो न केवल गाड़ियां दौड़ेंगी, बल्कि लोगों की जिंदगियां भी नये सिरे से तेज रफ्तार पकड़ेंगी। यही तो होता है—विकास का असली सफर।









