spot_img

नई शिक्षा नीति में शामिल है प्‍ले आधारित शिक्षा : पीएम

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो
  • वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से नरेंद्र मोदी ने किया इंडिया टॉय फेयर 2021 का उद्घाटन
  • खिलौनों के वैज्ञानिक पहलू को समझकर स्‍कूलों में लागू करने पर दिया जोर

कोहराम लाइव डेस्क : वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के पहले ‘इंडिया टॉय फेयर 2021’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि परिवारों में प्ले टाइम की जगह स्क्रीन टाइम ने ले ली है। खिलौनों का वैज्ञानिक  पहलू समझना चाहिए। स्कूल में इस पर प्रयोग करना चाहिए। हमारी नई शिक्षा नीति में प्ले आधारित शिक्षा को शामिल किया गया है। इसमें बच्चों में पहेलियों और खेलों के माध्यम से तार्किक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

Read More : दिउड़ी मंदिर पहुंचे महेंद्र सिंह धौनी, एक झलक पाने को बेताब दिखे प्रशंसक

2 मार्च तक चलेगा यह मेला

उल्‍लेखनीय है कि यह मेला 2 मार्च 2021 तक चलेगा। इसका मकसद खिलौना कारोबार से जुड़े खरीददारों, विक्रेताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों और डिजाइनरों को एक मंच पर लाना है। इस प्‍लेटफॉर्म के जरिए सरकार और उद्योग इस बात पर मंथन करेंगे कि खिलौना निर्माण और आउटसोर्सिंग का अगला ग्लोबल हब बनाया जाए।

Read More : BREAKING : PCR वैन में ही पुलिसकर्मी ने खुद को मारी गोली

टॉय इंडस्ट्री आत्मनिर्भर भारत का बहुत बड़ा हिस्सा

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, ‘आपसे बात करके लगा कि देश की टॉय इंडस्ट्री में कितनी ताकत है। इसे बढ़ाना आत्मनिर्भर भारत का बहुत बड़ा हिस्सा है। हम आज देश के पहले टॉय फेयर का हिस्सा बन रहे हैं। यह केवल एक व्यापारिक या आर्थिक कार्यक्रम भर नहीं है। यह देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की कड़ी है। इसकी प्रदर्शनी में कारीगरों और स्कूलों से लेकर कंपनियों तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1000 से ज्यादा एक्जीबिटर्स हिस्सा ले रहे हैं।’

Read More :कल Launch होगा ISRO का PSLV-C51 मिशन, जानें खासियत

हमारे खिलौनों में मनोरंजन के साथ मनोविज्ञान

मोदी ने कहा कि भारतीय खिलौनों की खूबी रही है कि उनमें ज्ञान और विज्ञान होता है। मनोरंजन होता है और मनोविज्ञान होता है। लट्‌टू को देखिए। वह बच्चों को ग्रेविटी और बैलेंस का पाठ पढ़ा देता है। गुलेल से खेलता बच्चा पोटेंशियल से काइनेटिक एनर्जी के बारे में सीख लेता है। नवजात बच्चे भी झुनझुने और बाजे घुमाकर सर्कुलर मूमेंट को महसूस करने लगते हैं।

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

एक-एक कर म’र गये एक ही परिवार के 5 लोग, दहशत…

Palamu : पलामू के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में...

ग्रहों की बदलती चाल, जुलाई में कैसा रहेगा आपका हाल… जानें

Kohramlive : सावन की दस्तक से पहले जुलाई का...

JSSC उत्पाद सिपाही भर्ती 2023: मेडिकल टेस्ट का शेड्यूल जारी…

Ranchi : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की बहुप्रतीक्षित उत्पाद...

अब इस दिग्गज क्रिकेटर ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा…

Kohramlive : इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान और दुनिया के...

बड़कागांव में खेल के मैदान से युवाओं को मिली नई सीख…

Hazaribagh : हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र की सिरमा पंचायत...