Ranchi : जहां कभी स्कूल की घंटी सिर्फ पढ़ाई के समय का संकेत देती थी, अब वही घंटी डिजिटल युग की दस्तक बन गई है। रांची के होटल केन में आयोजित विशेष कार्यशाला ने 40 स्कूलों के प्राचार्यों को एक मंच पर लाकर ई-स्कूल सॉफ्टवेयर की उस दुनिया से रूबरू कराया, जहां शिक्षा केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं, बल्कि हर डिवाइस, हर ऐप और हर क्लिक तक पहुंच गई है। “हमारी ज़िम्मेदारी सिर्फ पढ़ाना नहीं, बदलाव को अपनाना भी है,” यह कहना है सिटी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य मसूद कच्छी का, जिनकी आंखों में डिजिटल भविष्य की चमक थी।
कार्यक्रम में एक संकल्प था – हर स्कूल को तकनीक से जोड़ने का। और एक विश्वास कि झारखंड का हर बच्चा, हर शिक्षक और हर स्कूल अब समय के साथ नहीं, समय से आगे चलेगा। सॉफ्टवेयर के मार्केटिंग हेड संजय कुमार ने कार्यशाला में ई-स्कूल सॉफ्टवेयर की विशेषताओं के बारे में बताया, जो स्कूलों को प्रशासनिक कार्यों में मदद करता है। उपस्थिति, फीस मैनेजमेंट, रिपोर्ट कार्ड और अभिभावक संवाद जैसी जटिल प्रक्रियाओं को अब डिजिटल तरीके से सुलझाया जा सकता है। उनका कहना था, “यह सॉफ्टवेयर न केवल समय बचाता है, बल्कि कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद करता है। संजय कुमार ने आगे कहा, डिजिटल युग में स्कूलों के लिए तकनीकी उपकरणों को अपनाना अब जरूरी हो गया है। यह सॉफ्टवेयर स्कूल प्रबंधन और शिक्षा दोनों में सुधार लाने का एक बेहतरीन तरीका है। झारखंड के मार्केटिंग हेड विकास राजगढ़िया ने कहा हमारा लक्ष्य है कि हम बच्चों को एक ऐसी शिक्षा दे सकें, जो न केवल ज्ञान में, बल्कि तकनीकी रूप से भी सक्षम बनायें। रांची और आसपास के स्कूलों के प्राचार्य, जैसे ओरायन स्कूल नगड़ी, ईडन इंटरनेशनल पतरातू, वारिस पब्लिक स्कूल पतरातू, सूरज पब्लिक स्कूल कटहल मोड, समेत अन्य प्रमुख स्कूलों ने इस कार्यशाला में हिस्सा लिया। सभी ने इस सॉफ्टवेयर के फायदे को समझा और इसे अपने स्कूलों में लागू करने के बारे में सकारात्मक विचार व्यक्त किये।








