Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपने महाधिवेशन में ऐतिहासिक बदलाव करते हुये CM हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष घोषित किया है। वहीं, पार्टी के संस्थापक नेता और झारखंड आंदोलन के प्रणेता शिबू सोरेन को अब संस्थापक संरक्षक की भूमिका में लाया गया है। महाधिवेशन के दूसरे दिन झामुमो ने अपने संविधान में संशोधन करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया, जो अब तक हेमंत सोरेन के पास था। इसके स्थान पर ‘संस्थापक संरक्षक’ नामक एक नया पद बनाया गया, जिसे शिबू सोरेन को सौंपा गया है। इस प्रस्ताव को नलिन सोरेन ने रखा और स्टीफन मरांडी ने समर्थन किया। इसके बाद, शिबू सोरेन ने खुद हेमंत सोरेन को केंद्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से आशीर्वाद देने की अपील भी की।
1987 से पार्टी की कमान संभाल रहे शिबू सोरेन ने पांच दशकों में पार्टी को कई उतार-चढ़ावों से निकालते हुए एक मजबूत संगठन में तब्दील किया। अब ‘संस्थापक संरक्षक’ के रूप में उनकी भूमिका मार्गदर्शक की होगी — यानी संगठन की आत्मा बने रहेंगे, लेकिन संचालन की कमान अब अगली पीढ़ी को सौंप दी गई है। हेमंत सोरेन अब सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि संगठन के सबसे बड़े नेता के रूप में पार्टी को नेतृत्व देंगे। यह बदलाव महज़ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि झामुमो के नई पीढ़ी के नेतृत्व में संक्रमण का प्रतीक है। झामुमो ने अपने 53 सालों के राजनीतिक सफर में झारखंड आंदोलन से लेकर दिल्ली की सत्ता को चुनौती देने तक का सफर तय किया है।





