Kohramlive : “मैंने बचपन से ही देखा है कि बेहद मामूली-मामूली बात पर पति-पत्नी में झगड़े हो जाते थे। बात इतनी बिगड़ जाती थी कि उनकी जिंदगी खराब हो जाती थी। इनमें महिलाओं को बहुत ही बुरी स्थिति से गुजरना पड़ता था। मेरा मन शादी को तैयार नहीं था। बड़ी होते-होते मैंने ठान लिया कि मैं कभी शादी नहीं करूंगी। कॉलेज करने के बाद से ही मेरे लिये रिश्ते आने लगे। मम्मी-पापा भी जान पहचान वालों से कहते कि कोई अच्छा लड़का हो तो इसके लिये बताना। घर में इस तरह की बातें होने लगी कि बेटी है, बड़ी हो गई है, कब तक कुंवारी रखोगे। अब शादी कर दो। इन बातों से मैं दुखी होने लगी। मैं मम्मी-पापा को बता चुकी थी कि मुझे शादी नहीं करनी है, लेकिन यह इतना आसान नहीं था। वो यही कहते कि तुम्हारी शादी की उम्र हो चुकी है, अब तो शादी करनी ही होगी। पर मैं पूरी तरह से मन बना चुकी थी कि चाहे जो हो जाये, भगवान से ही शादी कर उन्हें अपना वर बना लूंगी। ताउम्र उनकी सेवा में जुटी रहूंगी। कई बार कुछ लड़के वाले देखने भी आये। एक-दो बार तो रिश्ता जैसे-तैसे टल गया, लेकिन बार-बार लड़के वाले आने लगे तो मैं देखने वालों से ही हाथ जोड़कर मना कर देती थी और अपनी इच्छा बता देती थी। जो ठाना, वो हो गया, मैंने मंदिर में विराजमान भगवान से शादी कर ली।” यह कहना है अनोखी शादी करने वाली पूजा सिंह का।
30 साल की पूजा ने अपने गांव के ही मंदिर में विराजमान भगवान से 8 दिसम्बर को शादी कर ली। शादी के बाद से पूजा अपने घर में ही रहती है और भगवान मंदिर में। पूजा हर सुबह उनके लिये भोग बना ले जाती है। पोशाक बनाती हैं और शाम को दर्शन के लिये जाती है। शादी पूरे रीति रिवाज से की गई। दुल्हन की तरह सजी-संवरी पूजा की वरमाला भी हुई और उसने सात फेरे भी लिये। कन्यादान और विदाई भी हुई। इस अनोखी शादी के करीब ढाई सौ लोग गवाह बने। मां ने कन्यादान किया। पूजा की सखी-सहेलियां भी मौजूद थी। मंगल गीत भी गाये गये।
भगवान के संग विवाह के बंधन में बंधी पूजा का कहना है कि उसने तुलसी विवाह के बारे में सुन रखा था। इस बारे में पंडित जी से पूछा तो उन्होंने भी कहा कि ऐसा हो सकता है। तब पूजा ने अपनी मां से बातें की। शुरू में मां ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है, पर बाद में मान गई। पापा दुखी थे और साफ मना कर दिये। इसी वजह से इस अनोखी शादी में उसके पापा नहीं आये। वहीं बहुत से लोगों ने उसका मजाक भी उड़ाया और कुछ ने सपोर्ट भी किया। उसने परमेश्वर को अपना पति मान लिया। वह हमेशा के लिये सुहागन हो गई। पूजा सिंह पॉलिटिकल साइंस से MA हैं। पिता प्रेम सिंह बीएसएफ से रिटायर हैं। एमपी में सिक्योरिटी एजेंसी चलाते हैं। मां रतन कंवर गृहणी हैं। तीन छोटे भाई हैं… अंशुमान सिंह, युवराज और शिवराज। तीनों कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई कर रहे हैं। परमेश्वर से विवाह का फैसला पूजा का खुद का था। शादी की सारी रस्में उसकी मां ने किया। उसके पिता आज भी इस शादी को राजी नहीं हैं।

जब पूजा से इस शादी के बारे में पूछा तो उसके आंखों में आंसू छलक आये। पूजा ने कहा शादी में पापा नहीं आये, उसे बहुत दुख है, लेकिन इस शादी से वो बहुत खुश है। घर, परिवार और समाज में जो कुछ उसने देखा है उसके बाद उसने कभी शादी नहीं करने को ठाना। वहीं लोगों ने ताने मारने शुरू किये। पर बिना परवाह किये परमेश्वर से शादी करने का फैसला ले लिया। पूजा का कहना है कि अब उसे कोई ताना नहीं मार सकता कि वह कुंवारी है। उसने भगवान को पति बना लिया। पूजा ने अपने कमरे में एक छोटा सा मंदिर बनाया है। उसमें उनके परमेश्वर हैं। पूजा उनके सामने ही अब जमीन पर ही सोती है। हर रोज सुबह सात बजे भोग बनाकर मंदिर ले जाती है। वहीं शाम में दर्शन को मंदिर जाती है। आचार्य राकेश कुमार शास्त्री के हवाले से बताया गया कि भगवान विष्णु शालिग्राम जी से कन्या का विवाह शास्त्रोक्त है। जिस तरह से वृंदा तुलसी ने ठाकुरजी से विवाह किया है, यह ठीक वैसे ही है। पहले भी ऐसे विवाह होते आये हैं। कर्मठगुरु पुस्तक में विवरण पृष्ठ संख्या 75 पर दिया गया है।

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