Hazaribagh(Sunil Sahu) : हजारीबाग(Hazaribagh) के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र का कुसुम्भा गांव में रहने वाली 13 साल की बच्ची की बलि चढ़ा देने वाली उसकी मां रेशमी देवी ने जेल जाने से पहले पुलिस को बताया कि उसने अपने बीमार बेटे को ठीक करने के लिये अपनी बेटी की बलि चढ़ा दी। उसने ऐसा एक भक्ताईन शांति देवी के कहने पर किया। भगतिनी शांति देवी ने उसको यकीन दिलाया कि बेटे की बीमारी दूर करने के लिये “कुंवारी लड़की की बलि” जरूरी है।
Hazaribagh में खामोशी का महौल
इस महापाप में उसका साथ उसके बेहद करीबी भीम राम ने दिया। इस भयावह कांड के बाद से पूरे गांव में एक अजीब से खामोशी है, वहीं, जितनी जुबां, उतनी तरह की बातें हो रही है। यहां सबसे चौंकाने वाली बातें यह सामने आई है कि रेशमी देवी ने अपने जिस बेटे को बीमार बता कर इस खौफनाक कांड को अंजाम दिया, वह बेटा बिल्कुल भला-चंगा है। बेटे ने खुद मीडिया को बताया कि उसे कोई बीमारी नहीं है। वह बिल्कुल ठीक-ठाक है। इस बार उसने 12वीं की परीक्षा लिखी। वहीं, काम करने के लिये भी जाता है। उसे कभी कोई बीमारी नहीं हुई।
बेटा दंग है कि आखिर उसे बीमार बता कर उसकी छोटी बहन की बलि क्यों चढ़ा दी गई। वह अपनी मां से बेहद नफरत करने लगा है, वह खुलकर बोलता है, जैसा की है, वैसा भोगेगी। जैसे उसकी बहन की बलि दी गई, ठीक वैसे ही उसके साथ भी हो, वह ऊफ तक नहीं करेगा। इससे बड़ा अपराध कुछ और हो ही नहीं सकता है।
वहीं, गांव के लोग भी बेहद गुस्से में है। 13 साल की बच्ची की बलि चढ़ाने में शामिल हर पापी को ऐसी सजा देने की बात कर रहे हैं कि दोबारा कोई ऐसा करने से पहले सौ बार सोचे। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि भीम राम का भी लूर-लक्षण ठीक नहीं था। वह गांव में भी दबंगई करते रहता था। यहां याद दिला दें कि रामनवमी के अष्टमी दिन, गांव में मंगल जुलूस निकला था।
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ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच, एक साजिश चुपचाप आकार ले रही थी। शाम ढलते ही बच्ची को भगतिनी के घर ले जाया गया, सिंदूर, काजल, प्रसाद, सब कुछ एक धार्मिक अनुष्ठान जैसा दिखाया गया। लेकिन यह पूजा नहीं, मौत की तैयारी थी। गांव के किनारे एक सुनसान बांसवाड़ी में एक सफेद बोरा पहले से बिछा था, मंत्रोच्चार के बीच अचानक माहौल बदल गया, “देवी को खून चाहिये”… और फिर शुरू हुई दरिंदगी।
इल्जाम है कि भीम राम ने गला दबाया, मां ने अपनी ही बच्ची के पैर पकड़ लिये और भगतिनी मंत्र पढ़ती रही। कुछ ही पलों में मासूम की सांसें थम गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य संदेही गुनहगार भीम राम ही सोशल मीडिया पर न्याय की मांग करता दिखा। जिसने खून किया, वही इंसाफ की बात करता रहा और चीखता-चिल्लाता रहा।
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झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा ने इस कांड के बेहद गंभीरता से लिया। वह खुद हजारीबाग तक गई। पुलिस को कई बिंदु पर काम करने का टास्क दिया। पुलिस ने मां, भीम राम और भगतिनी को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। तीनों टूट गये और अपना गुनाह कबूल कर लिया। जांच में साफ हो गया है कि यह अंधविश्वास और साजिश का खतरनाक मेल है।




