Kohramlive : शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो चुकी है और धार्मिक मान्यता के अनुसार नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद नवमी के दिन हवन करना अनिवार्य है। यह हवन साधना की पूर्णता और माता की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है।
हवन करते समय ध्यान रखें ये बातें
हवन स्थल और सामग्री हमेशा स्वच्छ रखें।
यदि हवन दो या अधिक लोग कर रहे हैं, तो केवल एक सदस्य घी की आहुति दें, बाकी सदस्य अन्य सामग्री का उपयोग करें।
हवन में आवश्यक सामग्री
हवन कुंड, घी, सूखी लकड़ियां, चावल, लौंग, सुपारी, पान, कपूर, लोबान, नारियल, कलावा और अन्य पारंपरिक हवन सामग्री।
मुख्य मंत्र और जाप
नवग्रह मंत्र:
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा, ऊँ चंद्राय नमः स्वाहा, ऊँ भौमाय नमः स्वाहा, ऊँ बुधाय नमः स्वाहा, ऊँ गुरवे नमः स्वाहा, ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा, ऊँ शनये नमः स्वाहा, ऊँ राहवे नमः स्वाहा, ऊँ केतवे नमः स्वाहा।गायत्री मंत्र का 21 बार जाप:
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा।अन्य मंत्र:
ॐ गणेशाय नमः स्वाहा, ॐ दुर्गाय नमः स्वाहा, ॐ नवग्रहाय नमः स्वाहा, ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा, ॐ हनुमते नमः स्वाहा, ॐ ब्रह्माय नमः स्वाहा, ॐ विष्णवे नमः स्वाहा, ॐ शिवाय नमः स्वाहा।
नारियल गोला आहुति
हवन के अंत में नारियल में कलावा बांधें और उसमें घी, पान, सुपारी, लौंग और प्रसाद डालें। इसे हवनकुंड की अग्नि में रखते हुए पूर्णाहुति मंत्र पढ़ें ऊँ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात पूर्णादिमं उच्यते। पुणस्य पूर्णम् उदच्यते। पूर्णस्य पूर्णभादाय पूर्णमेवावाशिष्यते। इस विधि से हवन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है, और माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Disclaimer : इस आर्टिकल में दी गई जानकारी ज्योतिषशास्त्रों पर आधारित है। इसकी सटीकता की पुष्टि कोहराम लाइव डॉट कॉम नहीं करता।




