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मस्जिद में मां और दो मासूमों का क’त्ल…

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UP : यूपी के बागपत के दोघट थाना क्षेत्र के गांगनौली गांव की बड़ी मस्जिद शनिवार दोपहर उस वक्त खून के सागर में बदल गई, जब मुफ्ती की पत्नी और दो मासूम बेटियां बेरहमी से मौत के हवाले कर दी गईं। एक नहीं, तीन नहीं, चार जिंदगियां खत्म कर दी गईं, क्योंकि मां इसराना पांच महीने की गर्भवती थी। मस्जिद की ऊपरी मंजिल पर मुफ्ती इब्राहिम का परिवार रहता था। दोपहर तक सब कुछ सामान्य था। लेकिन जब पड़ोस की छह बच्चियां रोज की तरह “आलिमा इसराना” से पढ़ने पहुंचीं, तो सीढ़ियों का दरवाजा अंदर से बंद मिला। दीवार फांदकर जब वे कमरे तक पहुंचीं, तो अंदर का मंजर देखकर दंग रह गईं। खून से सनी दीवारें, चारपाई पर छोटी सुमाइया और सोफिया बेसुध पड़ी थी। नीचे मां इसराना की लाश आधी लटकी थी। बच्चियों की चीख से पूरा गांगनौली गांव कांप उठा।

जिसने तालीम दी, उसी के हाथों मौत पाई

आलिमा इसराना कुरान की तालीम देने वाली महिला थी। पड़ोस की बच्चियों को वह दीनी शिक्षा देती थीं। लेकिन किसे पता था कि उसी तालीम से निकले दो नाबालिग, एक दिन उसी कमरे में खून की इबारत लिख देंगे। पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्यारों ने राजमिस्त्री की बसूली और चाकू से वार किये। पहले मां को मारा फिर दोनों बेटियों को।
इतना बेरहम हमला कि हर शरीर पर गहरे जख्मों के निशान थे। एक तरफ धारदार, दूसरी तरफ भारी, उसी से उन्होंने गर्भवती मां की सांसें भी छीन लीं। मस्जिद में सुरक्षा के लिये छह कैमरे लगे थे, पर वारदात के वक्त सभी कैमरे बंद मिले। पुलिस को शक है, हत्यारों ने पहले कैमरे बंद किये, फिर अंदर जाकर कत्ल को अंजाम दिया। यानी यह गुस्से में सोच-समझकर प्लान किया गया खून था। जब पुलिस कमरे में पहुंची, तो दो साल की सुमाइया की सांसें चल रही थीं।
एक जवान ने गोद में उठाया और गांव के डॉक्टर तक दौड़ा, मगर मौत की रफ्तार तेज थी। देवबंद से लौटे मुफ्ती इब्राहिम जब मस्जिद पहुंचे, तो अपनी दुनिया को उजड़ा देख बेसुध होकर गिर पड़े। रोते हुये मीडिया से बोले, “मेरा किसी से झगड़ा नहीं, किसी से दुश्मनी नहीं थी, ”उन्होंने बताया, मस्जिद के सीसीटीवी कैमरे हमेशा चलते रहते थे, मगर उनके मोबाइल से कई नंबर डिलीट कर दिये गये हैं। जैसे किसी ने साजिश के हर निशान मिटा दिये हों। SP सूरज कुमार राय ने बताया, दो नाबालिग संदेही गुनहगार गिरफ्तार किये गये हैं। दोनों मस्जिद में दीनी तालीम लेते थे। दोनों ने अपना गुनाह कबूल करते हुये पुलिस को बताया कि “मुफ्ती साहब हमें डांटते थे, मारते भी थे, गुस्सा आया तो सब खत्म कर दिया।” शनिवार को जब जाना कि मुफ्ती देवबंद गये हैं, दोनों दोपहर में मस्जिद पहुंचे, नीचे रखी बसूली उठाई, और इसराना व उसकी बेटियों को मौत के घाट उतार दिया।

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