Ranchi : झारखंड की धरती इन दिनों बादलों की बरसात से भीग रही है। कभी मूसलधार, कभी रिमझिम, मानो सावन का संगीत अब भी थमा नहीं। खेत-खलिहान लहलहा उठे हैं, मगर सड़कों और गलियों में पानी की धारा ने लोगों की रफ्तार रोक दी है। पलामू से लेकर रांची और जमशेदपुर तक किसानों के चेहरे खिले हुये हैं। धान की बाली अब ठंडी बूंदों के सहारे और भी भर रही है। वहीं, कई तरह की फसलें बर्बाद भी हो गयी। गांव के चौपाल पर बुजुर्ग कहते हैं, “ऐसी बरखा बहुत दिन बाद देख रहे हैं। खेत सोना उगलेंगे।” इधर, मौसम विभाग ने साफ कहा है , “अभी बरखा का सिलसिला थमेगा नहीं।” 10 सितंबर तक कभी तेज, कभी हल्की बारिश हो सकती है। 30–40 किमी की रफ्तार से हवायें चलेगी। कहीं-कहीं ठनका भी गिर सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खेतों और पेड़ों के नीचे न जायें, बिजली के खंभों से दूर रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
कस्बों और शहरों की परेशानी
हाट-बाज़ार में एक अलग नज़ारा है। रांची की सड़कों पर गड्ढों में पानी भर गया है। धनबाद में लोग छाते और पॉलिथीन ओढ़े हुये गलियों से निकल रहे हैं। बच्चे बारिश में भीगकर तालाब में मछलियां पकड़ने की जिद कर रहे हैं, जबकि दुकानदार छतरी तानकर अपना सामान बचाने में लगे हैं। किसानों के लिए यह बरखा किसी वरदान से कम नहीं, लेकिन शहर और कस्बों में जनजीवन की रफ़्तार थमी हुई है। लोग आसमान की ओर देखकर दुआ कर रहे हैं,”हे बादल, खेतों को सींचो, मगर बिजली मत गिराओ… बरखा का सुख मिले, दुख नहीं।”
बारिश का हाल
- अब तक 1042.4 मिमी बारिश, सामान्य से 25% ज्यादा।
- पूर्वी सिंहभूम सबसे आगे, 73% ज्यादा वर्षा।
- सरायकेला-खरसावां – 64% ज्यादा।
- रांची – 54% ज्यादा।
- मगर देवघर, गढ़वा, गोड्डा और पाकुड़ में बारिश कुछ कम हुई।










