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एक चीख ने सबको खींच लिया, फिर चारों बहनें…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के हरैया गांव के नदीआरा टोला में छठी की खुशियां में शामिल होने आई चार बेटियां काल की लहरों में डूब गईं। तालाब में नहाने गई ये चंचल मुस्कानें, चंद पलों में शोकगीत बन गईं। 10 साल की लाडो सिंह, 22 साल की अंकिता सिंह, 18 साल की रोमा सिंह और 15 साल की मीठी सिंह, ये चारों एक-दूसरे को बचाने की जद्दोजहद में मौत की गहराइयों में चली गईं। मीठी का छोटा भाई किसी तरह बचकर निकला और घर भागा, लेकिन जब तक मदद पहुंचती… देर हो चुकी थी। रोमा और मीठी तो छठी के शुभ अवसर पर रिश्तेदारों से मिलने आई थीं, किसे पता था कि यह मुलाकात अंतिम पड़ाव बन जायेगी।

परिजनों ने सभी को तत्काल गढ़वा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। जैसे ही गांव में ये खबर पहुंची, खुशियों की गूंज मातम की चीखों में बदल गई। घटना की सूचना पाते ही गढ़वा विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी, पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर, एसडीओ संजय कुमार और थानेदार बृज कुमार अस्पताल पहुंचे। परिजनों की आंखों में आंसू थे, दिल में सवाल… क्यों, कैसे और किसकी गलती थी? प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

इधर, कुछ गांवावालों ने बताया कि हरैया गांव के चंदन सिंह की बेटी लाडो गांव की गलियों में खेलती वो छोटी सी बच्ची, हर किसी की आंखों का तारा थी। उसका सपना था, गांव के स्कूल की सबसे तेज लड़की बनना। मां कहती, “तू तो हमारी सोने की लाडो है।” लेकिन उस दिन, तालाब की गहराई ने उसके सारे ख्वाब निगल लिये। सबसे छोटी होने के बावजूद जब बहनें डूबने लगीं, तो वो भी दौड़ी… और फिर लौटकर न आई। 22 साल की अंकिता, जितेंद्र सिंह की बेटी, बीए की पढ़ाई पूरी कर रही थी। उसका सपना था टीचर बनना—गांव की लड़कियों को पढ़ाना। हर सुबह वो मंदिर जाती, और मां के साथ घर के कामों में हाथ बंटाती। वो बस मीठी को नहाने के लिये ले गई थी। जब मीठी डूबने लगी, अंकिता सबसे पहले कूदी। वो बहन से ज्यादा, मां जैसी थी सबके लिये। लेकिन किसे पता था, वो कोशिश… उसकी आखिरी होगी।

18 साल की रोमा, पलामू के पगार गांव से गढ़वा आई थी। अपने मामा के घर छठी के कार्यक्रम में शामिल होने। वो तेज नहीं बोलती थी, पर आंखों में दुनिया जीत लेने की आग थी। कॉलेज में सबसे तेज थी, और गांव की पहली लड़की थी जिसने इंटर पास किया। उस दिन, जब सब डूब रहे थे… वो भी चिल्लाई नहीं। चुपचाप पानी में समा गई… जैसे ज़िंदगी से पहले ही समझौता कर चुकी हो। 15 साल की मीठी, लेस्लीगंज की रहने वाली थी। नाम के जैसी ही—मीठी मुस्कान। वो अपने छोटे भाई के साथ छठी में आई थी। भाई को बहुत प्यार करती थी। तालाब में सबसे पहले वही उतरी थी… और गहराई को समझ नहीं पाई। जब डूबने लगी, उसकी चीख ने सबको खींच लिया… और चारों बहनों की क़िस्मत को एक धागे में बांध दिया।

 

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