Bihar : उस सुबह अररिया के बनगामा की हवाओं में कुछ अजीब सी खामोशी थी। सूरज उगा जरूर था, मगर जैसे किरणों में चमक नहीं थी। और उधर, एक घर की चौखट पर बिछी थी एक नवविवाहिता की निष्प्राण देह, नाम था सपना कुमारी, उम्र बस 22 साल। सपना… एक नाम, एक उम्मीद, एक प्रेम कहानी। दरअसल पांच महीने पहले ही तो प्रेम ने सारे बंधनों को तोड़ कर उसकी मांग में सिंदूर भरा था। राधानगर की वह चंचल लड़की, जिसने अरमानों का हाथ थाम कर सोनू के साथ सात फेरे लिए थे, आज अस्थियों में बदलने को तैयार थी।
शुरुआत में सब कुछ ठीक था… या यूं कहें, ठीक दिखता था। लेकिन फिर रिश्तों की परतें उतरने लगीं। सास की आंखों में स्वर्ण की चमक थी, ननदों की बातों में ताने, और पति… वह तो अब प्रेमी नहीं, सौदागर बन चुका था। “चार लाख और एक बाइक… बस इतना ही तो चाहिये,” वो अक्सर कहता। और फिर एक दिन, जब उसके मायके वाले बेटी की हंसी सुनने को तरस रहे थे, एक फोन आया “आपकी बेटी ने दम तोड़ दिया है।” ये सुन मायकेवालों के पैरों तले जमीन बिखर गई। सपना के घरवालों का आरोप है कि “हमारी बेटी को मार दिया गया… दहेज के लिए।”
पुलिस पूछताछ कर रही है। पति और सास हिरासत में हैं। शव पोस्टमार्टम के लिए रवाना हो चुका है। लेकिन जिस चिता पर अब सपना का देह जलेगा, उसमें सिर्फ़ एक बेटी नहीं, एक प्रेम, एक विश्वास, और एक पूरा सपना जलकर राख हो जायेगा।












